मैनपुरी। पितरों के तर्पण का पर्व आज से शुरू हो रहा है। 15 दिन तक पितरों को जलदान के साथ ही उनका श्राद्ध भी किया जाएगा। इसीलिए इसे पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान नए कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा। 2 अक्तूबर को पितृ विसर्जन अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।
हर साल पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण और वंदन किया जाता है। पीढ़ी दर पीढ़ी तर्पण का ये सिलसिला चलता है। आज से पितरों के तर्पण का ये पर्व शुरू हो रहा है। घरों में लोग अपने पितरों का स्मरण कर उन्हें जलदान करेंगे। आचार्य रामानंद शास्त्री बताते हैं कि सूर्य जब कन्या राशि में जाता है तो पितृ अपने घर लौट आते हैं। ऐसे में उनका तर्पण करना जरूरी हो जाता है। 15 दिनों तक तर्पण का ये सिलसिला जारी रहता है। इसके बाद पितृ विसर्जनी अमावस्या पर फिर से पितृ विदा हो जाते हैं। इस बाद 18 सितंबर से 2 अक्तूबर तक पितृ पक्ष चलेगा। आचार्य बताते हैं कि विधि-विधान से पितरों का तर्पण करने पर पितृ अपना आशीर्वाद देकर विदा होते हैं। हालांकि इस दौरान नए कार्य आदि नहीं किए जाते हैं।