मैनपुरी। साहित्यकारों को सम्मान एवं स्मरण की श्रृंखला में शुक्रवार को होली पब्लिक स्कूल में 120 वीं काव्य गोष्ठी हुई। कवियित्री श्रीदेवी चौहान की काव्य पुस्तक सामयिकी का लोकार्पण किया गया। राजकिशोर राज ने- लोग लेकर नमक घूमते हाथ में जख्म अपने कभी मत दिखाया करो काव्य पाठ किया।
काव्य गोष्ठी में सत्येंद्र पाठक निडर ने चमक रही है आसमान में चंचल दामिनि अकड़़-अकड़़, काले-काले बादल देखो गरज रहे हैं रगड़-रगड़। रमेश चंद्र चक ने-चिंताओं से मुक्ति खोजो, सुख की कोई युक्ति खोजो। यश कुमार मिश्रा ने- भावों की मदिरा को पीता, मन के मदिरालय में काव्यपाठ किया। मनोज कुमार सक्सेना ने- कंचन सी तेरी देह, सीप सा तेरा मन, मेरे प्राणों में इस थिरकन सी घोल गया। नबाब सिंह राजपूत ने- बागन-बागन, खेतन-खेतन बज रही शहनाई वर्षा रानी आई। श्रीचंद सरगम ने-मैं बन जाऊं गीत तुम्हारा तुम मेरी कविता बन जाओ। श्रीदेवी चौहान ने- पति के परिवार के प्यार भरे गुलशन में खुशनुमा फूल बन बहार जो लाती है। निकिता चौहान ने- देश प्रेम का दिया जल रहा था एक दिल। वासुदेव मिश्र लालबत्ती ने- साधना सिद्ध प्रदायक है साधना मंगल दायक है काव्यपाठ किया।
संयोजक विनोद माहेश्वरी, आनंद प्रकाश शाक्य, बालक,राम राठौर, बदन सिंह मस्ताना, श्रीकृष्ण मिश्र, एसी तिवारी, प्रबोध भदौरिया ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता लाखन सिंह भदौरिया ने, मुख्य अतिथि डॉ. महेश कुमार द्विवेदी, विशिष्ट अतिथि सत्यसेवक मिश्र पूर्व प्रधानाचार्य रहे। दीन मोहम्मद दीन, जगदीश चंद्र त्रिपाठी, श्रीकृष्ण मिश्र, ज्ञानेंद्र दीक्षित, अभय शर्मा, संतोष कुमार हजेला, बृजनंदन सिंह टिल्लू मौजूद रहे।