सोरोंजी (कासगंज)। भगवान वराह के धाम तीर्थनगरी में मोक्षदा एकादशी के मौके पर शनिवार को देश भर से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ परिक्रमा कर मनोकामनाएं कीं। तीर्थनगरी में स्थित परिक्रमा मार्ग पर सुबह से ही आस्था और श्रद्धा का सैलाब दिखने लगा। ढोल, ढप, मंजीरे की धुन पर लोग भगवान वराह का संकीर्तन करके उत्साह के साथ आगे बढ़ रहे थे। सभी श्रद्धालु भगवान वराह की भक्ति में लीन थे। पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इस पावन परिक्रमा में हिस्सा लेकर पुण्य अर्जित किया। प्रात: बेला से आरंभ हुई परिक्रमा देर सायं तक जारी रही।भगवान वराह मंदिर से परिक्रमा शुरू हुई। इसमें शामिल हाेने के लिए गृह राज्य के अलावा, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य प्रांतों के श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने एक पहले शुक्रवार शाम से ही अपना डेरा जमा लिया था। तीर्थनगरी के सभी धर्मशाला, होटल और तीर्थ पुरोहितों के घरों पर श्रद्धालु ठहरे और तड़के ही परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं का कारवां परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ने लगा। तमाम श्रद्धालु अपने इष्ट देव की प्रतिमा के साथ परिक्रमा लगाते दिखे। दिल्ली के श्रद्धालुओं की टोली संकीर्तन मंडल के साथ पूरे उत्साह से परिक्रमा लगा रही थी। श्रद्धालु भक्तिभाव से नृत्य कर रहे थे और संकीर्तन कर भगवान वराह के साथ राधे-राधे के जयकारे भी लगा रहे थे। उन्होंंने गंगा मैया की जय-जयकार की। तीर्थनगरी और परिक्रमा मार्ग का माहौल पूरी तरह से धार्मिक नजर आ रहा था। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे संतों ने भी परिक्रमा लगाई। संतों के साथ श्रद्धालुओं की टोलियां भी चल रहीं थीं। कासगंज-बरेली मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार परिक्रमा करती नजर आ रही थी। स्टेडियम रोड पर भी कमोवेश यही नजारा था। श्रद्धालु हरि की पौड़ी स्थित गंगा जल में स्नान व वराह भगवान दर्शन के बाद पंचकोसी परिक्रमा में सम्मिलित हुए। परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले पौराणिक व दिव्य मंदिर योगेश्वर, सूर्यकुंड, सीतारामजी, चंद्रकूप, बटुकनाथ होते हुए यात्रा का पहला पड़ाव 84 घंटे वाली मंदिर पर हुआ। इसके बाद यात्रा बाछरू मंदिर, राम छितौनी मंदिर, सीता रसोई होती हुई सिगनल वाले बाबा के मंदिर दूसरे पड़ाव पर पहुंची। यहां से यात्रा शुरू होकर भागीरथी गुफा, करूआ देव मंदिर, सर्वसिद्ध गणेश मंदिर, महाप्रभु वल्लभाचार्य की बैठक होती हुई वापस वराह मंदिर पर जाकर समाप्त हुई। बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने ई रिक्शा में बैठकर परिक्रमा लगाई। पैदल चल रहे श्रद्धालु निर्धारित मार्ग से न निकलकर खेतों की पगडंडियों से होकर छोटे मार्गों से गुजर रहे थे। आयोजकों का दावा है कि देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे करीब पांच से अधिक श्रद्धालुओं ने परिक्रमा लगाई।