कहते हैं कि हर बात के लिए एक मौका होता है। किस मौके पर कौन सी बात करनी है ये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बखूबी जानते हैं। शायद यही कारण रहा कि शुक्रवार को मैनपुरी में जनसभा करने आए सीएम योगी के बयान में केवल जनता की फिक्र ही दिखाा। विपक्ष का उन्होंने अपने पूरे भाषण में जिक्र तक नहीं किया।
सपा के गढ़ में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व अन्य कई मंत्री मौजूद थे। मौका था दिवंगत नेता माधव राव सिंधिया की मूर्ति अनावरण और जनसभा का।
मूर्ति अनावरण के बाद जब योगी ने अपना भाषण शुरू किया तो मिजाज बदला हुआ था। पहले सीएम योगी ने माधव राव सिंधिया के राजनीतिक और देश के विकास में योगदान का बखान किया तो वहीं इसके बाद केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार की योजनाएं गिनाने लगे। इस बीच उन्होंने नगर निकाय चुनाव में मैनपुरी में सात सीटें जिताने के लिए भी जनता जनार्दन का आभार जाताया। लेकिन सीएम योगी अपने जिस चित परिचित अंदाज के लिए जाने जाते हैं वह कहीं नजर नहीं आया।
पूरे बयान में न तो उन्होंने एक बार भी विपक्ष का जिक्र किया और न ही भ्रष्टाचार व अन्य मुद्दों पर सपा को घेरा।
संयम के साथ एक मंझे हुए राजनेता की तरह सीएम अपनी सरकार की उपलब्धियां और सिंधिया राजघराने के देश के प्रति योगदान को गिनाते रहे। हालांकि योगी के इस अंदाज से उनके कुछ समर्थक मायूस भी हुए। हालांकि राजनीति के जानकारों ने योगी के इस कदम की सराहना की।
विपक्षियों की भी धरी रह गई तैयारी
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में विपक्ष को किनारे रखा। ऐसे में विपक्षियों की तैयारी भी धरी रह गई। दरअसल विपक्षियों को उम्मीद थी कि कहीं न कहीं योगी अपने भाषण में सपा और उनके नेताओं को जरूर घेरेंगे। ऐसे में उन्होंने भी बयानी पलटवार के लिए तैयारी कर ली थी। लेकिन योगी के संयम के चलते उनकी ये तैयारी धरी रह गई।