कासगंज। जिले में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट के लिए भवन बनकर तैयार है, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी इसे शुरू करने के लिए न लाइसेंस ही मिला है और न ही काउंसलर तैनात किया जा सका। यही कारण है कि सुविधा होने के बाद भी मरीजों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा। यूनिट शुरू करने के लिए लगी मशीनें धूल फांक रही है। वहीं, मरीजों को भी इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक में जमा होने वाले रक्त की एक यूनिट एक ही व्यक्ति के काम आ रही है। ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी और क्रॉयोप्रेसीपिटेट कंपोनेंट को अलग-अलग करके प्रयोग में लाने के लिए 26 लाख की लागत से ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट दिसंबर 2022 में तैयार हो गया। मार्च 2023 के पहले सप्ताह में मशीनें भी आ गईं थी।
यूनिट शुरू करने के लिए लाइसेंस के साथ एक काउंसलर की तैनाती होनी है। लेकिन एक साल बाद भी ये दोनों कार्य नहीं हो सके हैं। जिससे यूनिट स्थापित हो जाने के बाद भी चालू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
कंपोनेंट की इन रोगियों को होती है जरूरत
सामान्य खून की कमी वाले मरीजों को पीआरबीसी, जलने के कारण गंभीर हुए मरीजों व कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत होती है। जबकि डेंगू व अन्य संक्रमण वाले मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाकर बचाया जा सकता है। वहीं क्रायोप्रेसीपिटेट का उपयोग हेमोफिलिया या वॉन विलेब्रांड रोग के कारण रक्तस्राव के इलाज के लिए किया जाता है
यूनिट के लिए काउंसलर की डिमांड व लाइसेंस के लिए प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इनमें से कोई भी कार्य नहीं हुआ है। जिससे मरीजों के इलाज में दिक्क्त रहती है- डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस