मैनपुरी। कालाबाजारी (आवश्यक वस्तु अधिनियम) के मुकदमे दर्ज कराने के बाद संबंधित अधिकारी अदालत में पैरवी करना भूल गए हैं। अदालत में 18 मुकदमे लंबित हैं और दोषियों को सजा नहीं हो पा रही है।
कालाबाजारी के मामलों में संबंधित थानों में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत संबंधित थाने में संबंधित विभाग के अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा ही रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। रिपोर्ट लिखाने के बाद संबंधितों की समय से गवाही नहीं होने से अदालत में इस तरह के लंबित मुकदमों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
तीन साल में 27 मुकदमे दर्ज
तीन साल में इस अधिनियम के तहत 27 मामले विभिन्न थानों में दर्ज किए गए हैं। जिनमें से 22 की जांच पूरी होने पर अदालत में चार्जशीट भेजी जा चुकी है। पांच में जांच चल रही है।
सात साल तक की होती सजा
कालाबाजारी करने वाले के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर आरोपी की अदालत में उसी दिन जमानत नहीं होती है। उसको जेल जाना पड़ता है। ऐसे मामलों में सुनवाइई के बाद आरोप साबित होने पर स्पेशल जज आवश्यक वस्तु अधिनियम द्वारा आरोपी को सात साल तक की सजा सुनाई जा सकती है।
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कालाबाजारी के मुकदमों में सरकारी गवाहों की लापरवाही से मुकदमों का निस्तारण समय से नहीं हो पाता है। अदालत तक आने जाने में आरोपी की धन और समय कीबर्बादी होती है। गवाही समय से कराने की पहल होनी चाहिए। - अजय कृष्ण पांडेय, पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन
सरकारी गवाहों की समय से गवाही कराने केे लिए विशेष पहल की जरूरत है। समय से गवाही नहीं देने वाले सरकारी गवाहों के खिलाफ वेतन काटने, चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि देने जैसी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।- चतुर सिंह, पूर्व डीजीसी