सोरोंजी। तीर्थनगरी का राजकीय पशु चिकित्सालय केवल एक चिकित्सक और वार्ड सहायक के भरोसे है। इसमें कई वर्षों से फार्मासिस्ट व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में यहां आने वाले पशुपालकों को कई बार चिकित्सक के फील्ड में होने पर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। तीर्थनगरी में स्थित पशु चिकित्सालय में प्रतिदिन औसतन 20 पशु इलाज के लिए लाए जाते हैं। अस्पताल में बीमार पशुओं के उपचार अलावा गोशाला में भी प्रतिदिन गायों का चिकित्सकीय परीक्षण होता है। फार्मासिस्ट नहीं होने के कारण पशुपालकों को दिक्कत होती है। जब चिकित्सक क्षेत्र में होते हैं तो उन्हें उनके वापस आने का इंतजार करना पड़ता है। यदि फार्मासिस्ट की तैनाती चिकित्सालय पर हो तो उन्हें काफी सहूलियत होगी। वहीं कई बार यहां पशुओं को लगाने के लिए इंजेक्शन भी नहीं मिल पाते हैं। यह बाजार से ही खरीदने पड़ते हैं। यहां तैनात स्टाफ के लिए आवास की व्यवस्था नहीं है। बिजली की व्यवस्था काफी खराब है, यहां ग्रामीण क्षेत्र के फीडर से बिजली आपूर्ति लो वोल्टेज में होती है। यहां आने वाले पशु स्वामियों को भी बिजली नहीं होने पर गर्मी में परेशानी होती है।