पटियाली। हिंदी खड़ी बोली के महानायक सूफ़ी हज़रत अमीर खुसरो की पहचान दुनिया भर में हैं। लेकिन खुसरो अपने ही शहर में बेगाने बने हुए हैं ।खुसरो ने तबले का आविष्कार किया। उनके लिखे गीत फिल्मी दुनिया में भी छाए रहे। बुधवार को उनके जन्म दिवस पर उन्हें किसी ने याद नहीं किया। कस्बे में उनके नाम से बुना पुस्तकालय रैन बसेरा बनकर रह गया है। जिससे लोगों में रोष है। लगभग 25 वर्ष पूर्व राज्यसभा सांसद बसीम खान ने खुसरो की याद में अपनी निधि से तहसील परिसर स्थित उनके नाम से पुस्तकालय और पार्क का निर्माण कराया। पुस्तकालय व पार्क के निर्माण से नगरवासियों व साहित्य प्रेमियों में खुशी हुई। कुछ वर्षों जिलाधिकारी मासूम अली सरवर ने पुस्तकालय व खुसरो पार्क का साैंदर्यीकरण कराया और पूर्व विधायक जीनत खान ने अपने कार्य काल में पुस्तकालय का शुभारंभ कराया। पुस्तकालयों में पुस्तकों को रखवाया। लेकिन इन दिनों पुस्तकालय नगर पंचायत ने रैन बसेरा बता दिया है। जिससे लोगों में रोष है। नगर के फूल मियां, शायर मुश्ताक अली, कवि शरद लंकेश, रमेश, शाहिद, मास्टर इदरीश अहमद, जाहिद अली निजामी आदि ने पुस्तकालय को रैन बसेरा न बनाने और पाठकों के लिए व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग नगर पंचायत अध्यक्ष से की है।