कासगंज। निर्जला एकादशी पर्व को लेकर भक्तों में उत्साह है। इस साल निर्जला एकादशी पर शिव योग, सिद्घ योग एवं त्रिपुष्कर योग बन रहे हैं। ज्योतिषी के हिसाब से इसे काफी शुभ माना जा रहा है। पर्व पर उपवास रखने एवं दान आदि करने के लिए भक्तों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. मुकुंद बल्लभ भट्ट कहते हैं कि निर्जला एकादशी का काफी धार्मिक महत्व माना गया है। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी पर जो भक्त निर्जल रहकर व्रत रखते हैं। उन्हें वर्ष भर की बारह एकादशी पर व्रत करने का पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन अष्ट महाभैरव में से एक बटुक भैरव के प्राकट्य की मान्यता भी है। इसके भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
साल में पड़ने वाली 24 एकादशियों में से इसे सबसे कठिन एकादशी माना जाता है। इस साल एकादशी पर रात 9:39 बजे तक शिव योग रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग लगेगा। दोपहर 3:59 बजे से त्रिपुष्कर योग लग जाएगा। ये तीनों योग काफी महत्व पूर्ण माने गए हैं।