जिला अस्पताल में मरीजों की जांच करते डॉक्टर
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सर्दी की शुरुआत होते ही बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। मैनपुरी जिले में इस माह निमोनिया से पीड़ित सात बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि जिला अस्पताल से 25 बच्चे रेफर किए गए हैं। लेकिन जिले में बच्चों के उपचार की उचित व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में दोपहर दो बजे के बाद बाल रोग विशेषज्ञ नहीं बैठते हैं। वहीं, सौ शैया अस्पताल में एक साल से अधिक उम्र के बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है।
जिले में निमोनिया की रोकथाम के लिए अभी तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पीएचसी और सीएचसी पर जहां बच्चों का उपचार रामभरोसे हैं वहीं जिला अस्पताल में भी उपचार के नाम पर खानापूरी की जा रही है। लोग मजबूरी में लोग झोलाछापों से उपचार करा रहे हैं।
एक साल के बच्चों को करते भर्ती
जिले में बच्चों के लिए मातृ और शिशु सौ शैया अस्पताल संचालित हो रहा है। लेकिन यहां एक मात्र बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने के कारण यहां एक साल से अधिक उम्र के बच्चों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। जबकि निमोनिया पांच साल तक के बच्चों को अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसे में अन्य बच्चों के तीमारदार झोलाछापों से उपचार करा रहे हैं।