कासगंज। यूपी बोर्ड की नवीन सत्र की एनसीईआरटी की पुस्तकें सत्र शुरू होने के तीन माह बाद भी बाजार में नहीं आ सकी हैं। इससे विद्यार्थियों को मजबूरी में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। निजी प्रकाशकों की पुस्तकें एनसीईआरटी की अपेक्षा महंगी है। इससे अभिभावकों की जेब पर भी बोझ पड़ रहा है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकों को लागू किया गया था। हर वर्ष आमतौर पर जून अथवा जुलाई में नए सत्र की पुस्तकें बाजार में आ जाती हैं लेकिन इस वर्ष यह जुलाई के आधे से अधिक बीत जाने के बाद भी बाजार में नहीं आ सकी हैं। इससे अपने बच्चों के लिए अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदनी पड़ रही हैं। कक्षा नौ से 12 की एनसीईआरटी की पुस्तकों का सेट 500 से 900 रुपये तक आ जाता है। निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का सेट 2000-2500 रुपये तक मिल रहा है। इनमें भी भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, अंग्रेजी आदि की किताबें अधिक महंगी हैं। स्कूलों में पढ़ाई शुरू होने के कारण अभिभावकों को मजबूरीवश महंगी किताबें ही खरीदनी पड़ रही हैं। सोरों गेट स्थित पुस्तक विक्रेता दीपक गुप्ता ने बताया कि पुराने सत्र की एनसीईआरटी की किताबें थीं। जो कि बिक चुकी हैं। नए सेट के लिए ऑर्डर दिया हुआ है लेकिन अभी तक नहीं आ सकी हैं। बताया कि एनसीईआरटी की अपेक्षा निजी प्रकाशकों की पुस्तकें महंगी तो आती हैं।