डॉक्टर अलका सेन का कहना है कि ऑपरेशन मैंने ही किया है, मेरी बेटी भी चिकित्सक है, वह सहयोगी की भूमिका में थी। परिजनों ने प्रसूता को पानी पिला दिया था, जिससे उनके फेफड़ों में पानी भर गया था। जबकि ऑपरेशन के 24 घंटे तक पानी पिलाने की मनाही की थी। हालत खराब होने पर उनको प्रभा हॉस्पिटल शिफ्ट किया था। इलाज और ऑपरेशन में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।