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मेरी पहचान मेरी लाडलीः 'उड़नपरी' बनकर पिता की मेहनत को सम्मान दे रहीं ये बेटियां

Tue, 16 Jan 2018 04:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
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कमलेश, माता-प‌िता के साथ - फोटो : अमर उजाला
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मथुरा की कमलेश और ईशा के पापा पातीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में ग्राउंडमैन हैं। वो अपने साथ बेटियों को स्टेडियम ले जाते थे। पातीराम खिलाड़ियों के लिए मैदान तैयार करते और बेटियां खिलाड़ियों को दौड़ता देख दौड़ लगातीं।
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पातीराम गणेशरा स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम में संविदा पर ग्राउंडमैन है, आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसके बावजूद बेटियों में खेल और पढ़ाई के प्रति रुचि देखी तो मां प्रेमवती ने हौसला बढ़ाया। फिर क्या था मानो बेटियों के सपनों को पंख लग गए। बड़ी बेटी कमलेश होल्कर ने स्टेडियम में ही कड़ा अभ्यास शुरू कर दिया। 

मेहनत का नतीजा भी आया, कमलेश ने विद्याभारती की नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे देश में परचम लहरा दिया। एसजीएफआई में छह बार प्रतिभाग किया। ग्वालियर लक्ष्मीबाई यूनिवर्सिटी की ओर से ऑल इंडिया दौड़ प्रतियोगिता  में हिस्सा लिया।
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कमलेश ने बताया घर की माली हालत अच्छी नहीं है, इसके बाद भी उसके पापा ने उसे स्पोर्ट्स की बेस्ट यूनिवर्सिटी में पढ़ाया। कमलेश की छोटी बहन ईशा धनगर भी बहन को देखकर फर्राटे भरने लगी है। 

हाल ही में उसने एसजीएफआई की स्टेट प्रतियोगिता में भाग लिया, लेकिन कांस्य पदक से चूक गई। ईशा अब स्टेडियम में ही कड़ी मेहनत कर आगे की तैयारी कर रही है।
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