फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दोस्ती की मिसाल: कैप्टन ने सरहद पर जंग लड़ी, दोस्तों ने अफसरों से, प्रतिमा लगवाने के मुहिम जारी

Mon, 02 Aug 2021 12:07 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

 साल 2011 में बोदला चौराहे का नाम तत्कालीन मेयर अंजुला सिंह माहौर ने शहीद कैप्टन आशीष देवा मार्ग कर दिया। चौराहे के एक कोने पर पत्थर लगा है लेकिन प्रतिमा का इंतजार अब तक है। 
विज्ञापन
शहीद कैप्टन आशीष देवा के दोस्त - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

19 साल पहले साल 2002 में आपरेशन पराक्रम में ताजनगरी के जांबाज कैप्टन आशीष देवा ने अपनी जान कुर्बान कर दी। कैप्टन ने सरहद पर दुश्मनों के खिलाफ जंग लड़ी, उनके बलिदान के बाद उनके दोस्तों ने कैप्टन को सम्मान दिलाने के लिए अफसरों से। दोस्तों की मुहिम रंग लाई। कैप्टन के नाम पर सड़क का नामकरण हुआ है। प्रतिमा लगवाने के लिए मुहिम जारी है।

विज्ञापन

कालीचक से लाए मिट्टी
शहीद कैप्टन आशीष देवा की यादों को संजोने के लिए कैप्टन के पिता हरेंद्र देवा के साथ उनके दोस्त विकास सिंह, नासिर हुसैन, अमित कपूर कवायद में लगे रहे। साल 2011 में बोदला चौराहे का नाम तत्कालीन मेयर अंजुला सिंह माहौर ने शहीद कैप्टन आशीष देवा मार्ग कर दिया। चौराहे के एक कोने पर पत्थर लगा है लेकिन प्रतिमा का इंतजार अब तक है। तीनों दोस्तों का मानना है कि शहीद कैप्टन को वह सम्मान नहीं दिया गया जिसके वह हकदार थे। उसके लिए वह जंग लड़ते रहेंगे। जिस जगह कैप्टन शहीद हुए, कैप्टन के दोस्त कारगिल के उस कालीचक से मिट्टी लेकर आए थे और उससे शहीद स्मारक के पौधों को महकाया था।

प्रतिमा लगवानी है, पार्क बनवाना है
मेरा दोस्त सर्वोच्च बलिदान दे चुका है, बस उसे सम्मान दिलाने की हूक है। सड़क का नामकरण नहीं, बल्कि उसकी भव्य प्रतिमा और उसके नाम से पार्क बन जाए ताकि बच्चे प्रेरणा ले सकें -विकास सिंह, शहीद कैप्टन के दोस्त
विज्ञापन


लोगों को बलिदान के बारे में पता चले
हमारी कोशिश रही है कि दोस्त के नाम पर स्मारक बने और चौराहे के कोने पर प्रतिमा लगाकर लोगों को उसके बलिदान के बारे में पता चले कि हमें सुरक्षित रखने के लिए उसने अपनी जान दे दी। -अमित कपूर, शहीद कैप्टन के  दोस्त

ये भी पढ़ें:
विज्ञापन

मानवता की मिसाल: मासूम की जिंदगी बचाने के लिए दिया रक्त और गाढ़ी हो गई रघुवीर-अमित की दोस्ती
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें