पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम सिंह यादव
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गमों पर यादों का जब मरहम लगा, तो आंखों से अश्रुओं की अविरल धारा बह निकली। किसी की यादों में धरती पुत्र की एंबेसडर कार दौड़ने लगी, तो बच्चों से मिलने की नेताजी की अदा ने धरती पुत्र के चाहने वालों को खूब रुलाया। चुनाव प्रचार के दौरान मोहल्लों में नाम लेकर संबोधन करने की अदा भी लोगों को खूब याद आ रही है।
मंगलवार को सैफई में जैसे-जैसे मुखाग्नि की लपटों ने आसमां से बातें करनी शुरू कीं, वैसे-वैसे शहर में नेता जी की यादें जिंदा होती चली गईं। इन्हीं यादों के सहारे शहर के लोग भी समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की यादें एक-दूसरे से साझा करते रहे। लोगों ने नम आंखों से मुलायम सिंह को श्रद्धांजलि दी।
1984 में केंद्र की राजनीति में रखा था कदम
मुलायम सिंह यादव ने प्रदेश से केंद्र की राजनीति में वर्ष 1984 में कदम रखा। उन्होंने इटावा से कांग्रेस नेता बलराम सिंह यादव के खिलाफ औरैया के रविंद्र सिंह चौहान को चुनाव लड़ाया। शहर के मोहल्ला कटरा में व्यापारी नेता जय प्रकाश आर्य के मकान में चुनाव कार्यालय बनाया गया। कार्यालय में एक महीने तक नेताजी रुके थे।
कार्यालय से हर रोज गांव-गांव चुनाव प्रचार के लिए मुलायम सिंह यादव एंबेसडर कार से सफर तय करते थे। मोहल्ले के लोगों से नाम लेकर हालचाल पूछने की अदा को भी काफी याद किया गया। देवीपुरा गांव के रहने वाले वीपी सिंह बताते हैं कि देहात में चुनावी सभाओं के दौरान जब हेलीकॉप्टर खेतों में उतरता था, तो वह नजारा देखने लायक होता था। नेता जी को पास से देखने के लिए लोगों में होड़ लगी रहती थी।
पिता के साथ बाजार आते थे मुलायम
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव का मैनपुरी से गहरा नाता रहा। मंचों से कई बार राजनीतिक विरोधियों को चुनौती देने के कारण उनकी सभाओं का लोगों को इंतजार रहता था। जिला से ही उनका गांव सैफई लगा हुआ था। करहल कस्बे में नेता जी अपने पिता सुघर सिंह यादव के साथ बाजार करने आते थे। नेता जी ने मैनपुरी के क्रिश्चियन मैदान, कोसमा चौराहा, पड़रिया चौराहा, कुरावली में जनसभाएं कीं।
मुलायम सिंह वाली मैनपुरी
गांव रठेरा के रहने वाले रामराज सिंह बताते हैं कि कई साल पहले दिल्ली गए थे। वहां लोगों को यह बताने पर कि हम मैनपुरी से आए हैं, तो उन लोगों ने हमें नेता जी का पता आसानी से बता दिया। वहां नेता जी को काफी लोग मुलायम सिंह वाली मैनपुरी के नाम से जानते थे।