मैनपुरी। सरकारी खरीद केंद्रों पर धान की खरीद शुरू नहीं हो सकी है। एक महीने बाद भी खरीद केंद्रों पर सन्नाटा छाया हुआ है। किसान धान बेचने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। धान बेचने के लिए किसानों के नहीं पहुंचने से सरकारी खरीद केंद्रों पर धान की खरीद शुरू नहीं हो सकी है।
सरकारी खरीद केंद्रों पर एक अक्तूबर से धान की सरारी खरीद शुरू होनी थी। खरीद केंद्रों पर किसानों का धान खरीदने के लिए वारदाना भी पहुंचा दिया गया। एक महीना बीतने के बाद भी धान खरीद केंद्रों पर सन्नाटा ही छाया हुआ है। किसान धान बेचने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं।
अधिकांश किसान मंडी में आढ़त पर ही अपना धान बेच रहे हैं। किसानों के नहीं पहुंचने से धान खरीद केंद्रों पर धान की खरीद शुरू नहीं हो सकी है। किसानों को धान बेचने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है। जिन किसानों का पंजीकरण होगा वहीं किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर अपना धान बेच सकेंगे। धान खरीद केंद्रों पर किसानों के धान बेचने के लिए नहीं पहुंचने से कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
धान खरीद के लिए बने 16 खरीद केंद्र
धान खरीदने के लिए जिले में 16 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। खाद्य विभाग ने मैनपुरी मंडी, भोगंाव मंडी, बेवर मंडी, जागीर और बरनाहल के पीडीएस गोदाम में खरीद केंद्र बनाए हैं। पीसीएफ ने साधन सहकारी समिति गढ़िया कुरावली, टोडरपुर, ऊंचा इसलामाबाद, बसैत, कुर्रा, बरनाहल पूर्वी, बमटापुर, सुजरई, सहकारी संघ किशनी में खरीद केंद्र बनाए हैं। भारतीय खाद्य निगम ने भोगंाव मंडी तथा करहल में सरकारी धान खरीद केंद्र बनाए हैं।
आरटीजीएस से होता भुगतान
सरकारी खरीद केंद्रों पर खरीदे गए धान का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किसान के खाते में एक सप्ताह से 15 दिन में कर दिया जाता है। पंजीकरण के समय ही किसान का खाता नंबर अभिलेखों में दर्ज किया जाता है। किसान जो खाता नंबर दर्ज कराते हैं। उसी खाते में आरटीजीएस के माध्यम से किसान को भुगतान किया जाता है।
पंजीकरण कराने वाले किसानों के धान की ही सरकारी खरीद केंद्रों पर खरीद होती है। किसान पहले बासमती चावल बेचता है। बाद में मोटा चावल बेचता है। दो तीन दिन में सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों के धान की खरीद शुरू होने की उम्मीद है। खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी हैं।
-उदित नारायण, जिला खाद्य विपणन अधिकारी