मैनपुरी। विकास खंड घिरोर की ग्राम पंचायत में पांच साल पहले एक पंचायत सचिव ने परिवार रजिस्टर में युवक की जन्मतिथि में हेराफेरी कर दी। एक साल पहले हुई शिकायत पर जांच में पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।
कार्रवाई से बचने के लिए सचिव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए सचिव के विरुद्ध ही कार्रवाई के आदेश दे दिए। हाईकोर्ट के आदेश के छह माह बाद भी दोषी पंचायत सचिव के विरुद्ध जिम्मेदारों ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई है।
ग्राम पंचायत अटा हरैना निवासी राकेश कुमार व गणेश कुमार पुत्र पूसेलाल ने शिकायत की थी। इसमें कहा था कि परिवार रजिस्टर में गांव निवासी युवक संतोष कुमार पुत्र सियाराम की जन्मतिथि में हेरफेर किया गया है। उन्होंने 2016 में तैनात रहे तत्कालीन पंचायत सचिव गिर्राज सिंह पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगा था। शिकायत पर जांच हुई तो मामला सही पाया गया। दरअसल ये पूरा खेल पट्टा आवंटन के लिए किया गया था। पट्टा आवंटन के दौरान संतोष कुमार की उम्र 14 वर्ष थी, लेकिन अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर पट्टा ले लिया गया। जब जन्मतिथि में हेरफेर साबित हुआ तो तत्कालीन सचिव पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए।
तत्कालीन पंचायत सचिव गिर्राज सिंह ने हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दाखिल की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद सचिव को ही दोषी पाया और याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने सचिव के विरुद्ध एफआईआर करने के लिए भी सहमति जताई थी। कई बार उप जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार खंड विकास अधिकारी घिरोर को एफआईआर कराने के आदेश दिए, लेकिन उनका पालन नहीं हो सका।
शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र पर एक बार फिर एसडीएम घिरोर शिव नारायण ने बीडीओ घिरोर को एफअआईआर दर्ज कर अवगत कराने के लिए लिखा है। इसे भी एक माह का समय बीत चुका है, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा सकी। इससे साफ है कि अधिकारी दोषी सचिव को बचाने में जुटे हुए हैं।
बीडीओ बोले डीपीआरओ कराएं कार्रवाई
एसडीएम घिरोर शिवनारायण ने बीडीओ घिरोर को 14 अक्तूबर 2022 को दोषी सचिव पर एफआईआर कराने के आदेश दिए थे, पर एफआईआर नहीं हुई। जब इस बारे में बीडीओ घिरोर अशोक पाल सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने उप जिलाधिकारी का पत्र तत्काल डीपीआरओ को भेज दिया था। वहीं से कार्रवाई की जानी है। वहीं डीपीआरओ अविनाश चंद्र का कहना है कि बीडीओ को ही कार्रवाई करनी थी। ऐसे में दोनों ही अधिकारी एक दूसरे के पाले में गेंद फेंक रहे हैं, लेकिन इसका खामियाजा शिकायतकर्ता को भुगतना पड़ रहा है।