मैनपुरी। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 25 जनवरी से शुरू हो गईं। हालांकि पहले दिन अवकाश के चलते किसी भी कॉलेज पर परीक्षक नहीं पहुंचा। जिन कॉलेजों में विज्ञान विषय के प्रवक्ताओं के पद रिक्त चल रहे हैं। वहां प्रयोगात्मक परीक्षाओं में खानापूरी का कार्य सहायक अध्यापकों से कराया जा रहा है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षाओं का कार्य 25 जनवरी से शुरू कर दिया है। ऑनलाइन परीक्षकों की तैनाती के साथ कड़ी निगरानी में परीक्षाएं कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन सरकारी निर्देशों के बीच शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या खड़ी कर रही है। विभगीय रिकार्ड की यदि बात करें तो वित्तविहीन और सहायता प्राप्त काॅलेजों को तो छोड़ा यहां राजकीय काॅलेजों में ही शिक्षकों की सि्थति अच्छी नहीं है। 22 में से 16 कॉलेज ऐसे हैं जहां इंटरमीडिएट पर प्रयोगात्मक कार्य के लिए विज्ञान के शिक्षक ही नहीं हैं। छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए अधिकारियों के निर्देश सहायक अध्यापकों की मदद से प्रयोगात्मक कार्य को पूरा कराया जा रहा है।
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आंतरिक कार्य के मूल्यांकन के लिए मांगे शिक्षक
इंटरमीडिएट में प्रयोगात्मक परीक्षा 30 अंकों की है। इसमें 15 नवंबर आंतरिक मूल्यांकन के होते हैं जबकि 15 नवंबर ही वाह्य मूल्यांकन के लिए हैं। जिले के 16 कॉलेजों में आंतरिक मूल्यांकन के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में यह कार्य आस-पास के शिक्षकों की मदद से कराया जा रहा है। कुछ इंटर काॅलेजों में हाईस्कूल स्तर के विज्ञान टीचरों से आंतरिक मूल्यांकन का कार्य कराना पड़ रहा है।
केस नंबर-एक
राजकीय इंटर कॉलेज मैनपुरी में इंटरमीडिएट के छात्रों के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित विषय में प्रवक्ताओं के पद रिक्त चल रहे हैं। अब प्रयोगात्मक कार्य के लिए यहां सहायक अध्यापकों की मदद ली जा रही है।
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केस नंबर-दो
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मैनपुरी। यहां भी जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान विषय का कोई प्रवक्ता नहीं है। यहां भी सहायक अध्यापकों की मदद से छात्राओं का प्रयोगात्मक कार्य पूरा कराया जा रहा है।