सोरोंजी (कासगंज)। अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले भगवान श्रीराम के मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर तीर्थनगरी में भी खासा उल्लास है। पुराणों में तीर्थनगरी में भगवान श्रीराम के आगमन का उल्लेख मिलता है। भगवान श्रीराम ने सपरिवार यहां आकर अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान किया था। भगवान श्रीराम यहां जिस स्थान पर रुके थे वहां रघुनाथजी मंदिर स्थापित है। तीर्थनगरी के विद्वान बताते हैं कि गर्ग संहिता, वराह पुराण आदि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीराम अपने कुटुंब के साथ मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को शूकरक्षेत्र में आए और उन्होंने यहां स्नान व उपवास कर पितरों का तर्पण व पिंडदान किया और ब्राह्मणों को भोजन कराया। भगवान श्रीराम ने यहां जिस टीले पर विश्राम किया वहां बाद में करीब 370 वर्ष पूर्व भव्य रघुनाथजी मंदिर बनवाया गया। इस मंदिर में प्रतिदिन तुलसीकृत रामचरित मानसपाठ व संकीर्तन होता है और समय समय पर अन्य धार्मिक अनुष्ठान मंदिर में होते हैं। बताया गया कि भगवान श्रीराम की आज्ञा से उनके अनुज शत्रुघ्न ने मधुरापुरी पर आक्रमण करके दैत्य लवणासुर का वध किया था। लवणासुर के वध के पश्चात यह सूचना मिलने पर भगवान श्रीराम प्रसन्न हुए और उत्सव मनाने की इच्छा से शूकरक्षेत्र से मथुरा प्रस्थान कर गए।रघुनाथ जी मंदिर का निर्माण 370 वर्ष पूर्व जयपुर के राजा मानसिंह ने करवाया जो प्राचीन मंदिर कला पर आधारित है। इस मंदिर में भगवान श्रीराम, जानकारी, राधाकृष्ण, सिद्धिविनायक गणेश जी की अष्ट धातु की मूर्तियां स्थापित हैं। महाराज मानसिंह द्वारा नियुक्त सेवायत बाबा रामदेव की सातवीं पीढ़ी के विष्णु रामदास इस मंदिर की देखभाल करते हैं। हर वर्ष चैत्र मास में रामनवमी को भगवान राम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।