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लोकसभा चुनाव 2019: आगरा और सीकरी से मौजूदा भाजपा सांसदों के टिकट कटे, इनकी लगी लॉटरी

Fri, 22 Mar 2019 11:14 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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भाजपा प्रत्याशी राजकुमार चाहर, एसपी सिंह बघेल - फोटो : अमर उजाला
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भाजपा ने आगरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद रामशंकर कठेरिया और फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल का टिकट काट दिया है। होली पर जारी उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम नहीं है। उनकी जगह नए प्रत्याशी हैं। योगी सरकार में पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल को आगरा से उतारा गया है। फतेहपुर सीकरी से राजकुमार चाहर को प्रत्याशी बनाया गया है।
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आगरा लोकसभा सीट 2009 में एससी के लिए आरक्षित हुई। उसी चुनाव में कठेरिया जीते। इसके बाद 2014 में मोदी लहर में विजय श्री हासिल की। उनकी हाईकमान तक पकड़ बताई जाती है लेकिन टिकट की बाजी इस बार हार गए। उनका टिकट पक्का माना जा रहा था लेकिन ऐन वक्त पर बाजी पलट गई और एसपी सिंह बघेल मुकद्दर के सिकंदर बनकर सामने आए।

चौधरी बाबूलाल विधायक रहे, मंत्री रहे। 2014 में भाजपा में आए, टिकट मिला और मोदी लहर में सांसद बन गए। उनका दावा इस बार कमजोर माना जा रहा था। पार्टी में और बाहर भी उनका विरोध हुआ। इस कारण फतेहपुर सीकरी से कई दावेदारों के नाम आए। इनमें किस्मत जगी राजकुमार चाहर की। भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बना दिया।
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विरोध ले डूबा

कठेरिया का टिकट कटने के बाद सबकी नजरें उनके अगले कदम पर है। वो सियासत के धुरंधर खिलाड़ी कहे जाते हैं। पहले भी ऐसा हो चुका है कि वो कमजोर पड़ते नजर आए हैं, लगा है कि बाजी हार गई लेकिन हारी बाजी को पटलकर जीत में बदला है। 

इस बार इम्तिहान कड़ा है, चुनौती बड़ी है। 2016 में जब उन्हें मंत्री पद से हटाया गया था, तब भी कुछ लोगों ने कहा था कि इस सदमे से उबर नहीं पाएंगे, लेकिन कठेरिया ने इसे गलत साबित किया। वो 2017 में एससी आयोग के चेयरमैन बने। यह पद अभी भी उन्हीं के पास है।

कभी दूसरों को टिकट दिलाते थे कठेरिया

पिछले साल की ही बात है। मेयर के चुनाव में टिकट की लड़ाई जबरदस्त हुई थी। नजरें इस पर लगी थीं कि कठेरिया क्या करते हैं। नवीन जैन उनके करीबी दावेदार माने जा रहे थे। अन्य दावेदारों के साथ विधायक खड़े थे, संगठन के स्थानीय नेता भी थे। तब कठेरिया का कद सामने आया।  टिकट नवीन जैन का मिला।

हालांकि नवीन जैन की अपनी पकड़ भी मजबूत है। लेकिन भूमिका कठेरिया ने भी निभाई। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सबने देखा। राकेश बघेल को कठेरिया का करीबी माना जाता है। कहते हैं कि कठेरिया ने न केवल उन्हें उम्मीदवार बनाया, बल्कि कुर्सी दिलाने में भी अहम रोल निभाया। वक्त वक्त की बात है। कभी कठेरिया टिकट दिलाते थे, इस बार उनका खुद का पत्ता साफ हो गया।
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