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Kasganj: हेपेटाइटिस बी के जानें लक्षण, कासगंज में तेजी से बढ़ रहे मरीज

Tue, 29 Nov 2022 05:10 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज

सार

सीएमएस डॉ. कृष्ण अवतार ने बताया कि जिला अस्पताल पर हेपेटाइटिस पीड़ित व्यक्ति के इलाज के लिए अलग से कोई ट्रीटमेंट सेंटर नहीं है। लिवर विशेषज्ञ चिकित्सक भी तैनात नहीं है। जिससे इलाज में दिक्क्त रहती है।
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हेपेटाइटिस बी के लक्षण - फोटो : pixabay
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विस्तार
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कासगंज जिले में हेपेटाइटिस बी के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। तीन माह में ही जिला अस्पताल में 624 मरीज इस  बीमारी के चिंहित हो चुके हैं, लेकिन जिले में इस बीमारी के उपचार के कोई इंतजाम नहीं हैं। इस वजह से मरीजों को बाहरी जनपद में जाकर इलाज कराना पड़ता है।

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हेपेटाइटिस लिवर संबंधी बीमारी है। इस बीमारी में ए और सी कम खतरनाक होते हैं, लेकिन बी सबसे अधिक खतरनाक मानी जाती है। इस बीमारी की चपेट में आने वाले व्यक्ति के लिवर में सूजन, जलन की समस्या आ जाती है। प्रभावित व्यक्ति को पीलिया होने का खतरा रहता है। इस बीमारी के अनियमित खानपान, दूषित जल और भोजन का सेवन करने, शराब का अधिक सेवन करने से फैलने का खतरा रहता है । इस बीमारी के इलाज के लिए जिला अस्पताल पर अलग से ट्रीटमेंट सेंटर की व्यवस्था रहती है, लेकिन जिला में यदि इस बीमारी के इलाज की बात की जाए तो स्थिति काफी खराब है। 

जिला अस्पताल में ट्रीटमेंट सेंटर तो दूर की बात है लिवर संबंधी विशेषज्ञ चिकित्सक तक नहीं है। जबकि जिला अस्पताल पर बड़ी संख्या में मरीज इस बीमारी से प्रभावित होकर पहुंचते हैँ। जिला अस्पताल पर मरीजों की जांच के ही इंतजाम हैं। तीन माह में 624 मरीज में हेपेटाइटिस बी के मिल चुका है। सी के भी 372 मरीज सामने आ चुके हैं। जिला अस्पताल पर आने वाले मरीजों का इलाज तक नहीं मिल पाता। 
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सीएमएस डॉ. कृष्ण अवतार ने बताया कि जिला अस्पताल पर हेपेटाइटिस पीड़ित व्यक्ति के इलाज के लिए अलग से कोई ट्रीटमेंट सेंटर नहीं है। लिवर विशेषज्ञ चिकित्सक भी तैनात नहीं है। जिससे इलाज में दिक्क्त रहती है। वहीं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अंजुश  ने बताया कि हेपेटाइटिस बी से बचाने के लिए विभाग के द्वारा बच्चों के टीकाकरण की व्यवस्था है। बच्चे को जन्म के तुरंत बाद इसका टीका लगाया जाता है। यदि जन्म के समय टीका न लगा हो तो एक माह तक टीका लग सकता है।

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हेपेटाइटिस बी के लक्षण

-गहरे रंग का मूत्र आना

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-जोड़ों में और मांसपेशियों में दर्द
-भूख में कमी होना
-बुखार रहना
-पेट में परेशानी होना
-जी मिचलाना,उल्टी आना
-आंखों  और त्वचा का पीला पड़ जाना
इस तरह फैलती है बीमारी
-संक्रमित व्यक्ति के टूथब्रश और रेजर के ब्लेड का इस्तेमाल करने से
- टैटू बनवाने में एक ही सुई इस्तेमाल करने से
- जन्म के दौरान संक्रमित माँ से उसके पैदा होने वाले बच्चे को 
-संक्रमित व्यक्ति का रक्त शरीर में चढ़वाने से
-संक्रमित व्यक्ति को लगाए गए इंजेक्शन की सूई का प्रयोग करने से




 

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