कासगंज के गांव किसरौली के रहने वाले जांबाज लांस नायक कुंवरपाल ने 16 अक्टूबर 2000 को अपना जीवन बलिदान कर दिया था। वह अपने पीछे पत्नी और दो बेटे को छोड़ गए थे। हालांकि उनका सपना था कि बेटा आर्मी में जाकर देश सेवा करे, लेकिन वो सफल नहीं हो सका।
कारगिल युद्ध के ऑपरेशन रक्षक के दौरान 16 अक्टूबर 2000 को कुंवरपाल सर्वोच्च बलिदान देते हुए शहीद हुए। शहीद कुंवरपाल की याद में गांव के बाहर शहीद स्मारक बना है। जहां शहीद की प्रतिमा स्थापित की गई है। शहीद का परिवार अभी भी गांव में रहता है। जिस समय कुंवरपाल शहीद हुए उस समय उनके बच्चे छोटे थे। जब बच्चे बड़े हुए और सेना में जाने की तैयारी की, लेकिन भर्ती की पात्रता को पूरा नहीं कर पाए।
शासन के स्तर से मिलने वाली सुविधाएं व आर्थिक सहायता शहीद के परिजनों को मिली, लेकिन पेट्रोल पंप पाने की हसरत पूरी नहीं हो सकी। शहीद की पत्नी सरोज देवी ने बताया कि उनके पति हमेशा चाहते थे कि उनका एक बेटा भी सेना में जाए। उनके बड़े बेटे सुनील ने सेना में जाने की तैयारी की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। अब सुनील नोएडा में एक निजी कंपनी में नौकरी करता है, जबकि छोटा पुत्र गौरव खेतीबाड़ी संभालता है। परिवार के पास 7-8 बीघा खेती है। पेंशन और खेती ही आमदनी का जरिया है।
यह चाहता है शहीद का परिवार
शहीद की पत्नी सरोजदेवी का कहना है कि परिवार की जीविका चलाने के लिए पेट्रोल पंप नहीं मिल सकी। इसके लिए प्रयास भी किए। यदि यह सुविधा मिल जाए तो बेटे काम से जुड़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि गांव के बाहर शहीद स्तंभ बना हुआ है। यहां लाइट की व्यवस्था हो तो रात को रास्ता निकलने वाले लोगों को राहत मिलेगी और शहीद की प्रतिमा रात को दिखाई दे सकेगी।
संपर्क में रहता है विभाग
जिला सैनिल कल्याण अधिकारी सतीश चंद्र ने बताया कि जिले में किसरौली के सैनिक लांस नायक कुंवरपाल ने ऑपरेशन रक्षक में सर्वोच्च बलिदान दिया। सैनिक के परिवार को कोई परेशानी न हो इसको लेकर जिला सैनिक कल्याण विभाग परिवार के संपर्क में रहता है।