चार जुलाई को घुसपैठियों की ओर से हो रही फायरिंग में रविकरन सिंह आठ गोलियां लगीं थीं। वीर सपूत रविकरन सिंह अंतिम सांस तक ट्रिगर खींचते रहे। अंत में वह वीरगति को प्राप्त हो गए। सात जुलाई 1999 को उनका पार्थिव शरीर मथुरा लाया गया। इसके बाद गांव नावली में अंतिम संस्कार किया गया।
रविकरन की शहादत पर रो पड़ा था पूरा क्षेत्र
गांव नावली निवासी मनोज प्रधान और रामगोपाल चौधरी बताते हैं कि उस वक्त गांव के काफी लोग रेडियो पर समाचार सुनते थे। चार जुलाई की शाम जिला प्रशासन और नौहझील पुलिस ने रविकरन की शहादत की सूचना दी, तो नावली गांव के साथ-साथ पूरा नौहझील क्षेत्र रो पड़ा था।
रविकरन की शहादत के वक्त बेटा शैलेन्द्र मात्र 18 महीने का था। शहीद के भाई गोविंद सिंह बताते हैं कि शैलेन्द्र सिंह उस समय तुतलाकर कुछ कुछ शब्द बोलता था। और बेटी नीतू साढ़े तीन साल की थी। कारगिल विजय दिवस पर गांव के लोगों ने शहीद रविकरन को श्रद्धांजलि देकर नमन किया।
सेना में देश सेवा कर रहे क्षेत्र के जवान
नौहझील ब्लॉक क्षेत्र में नौहवारी-नरवारी के 120 गांव बसे हुए हैं। इस क्षेत्र के हजारों नौजवान सेना में देश सेवा कर रहे हैं। देश की सीमा पर नौहवारी-नरवारी के नौजवान युवक डटकर मुकाबला करते हैं। यही नहीं इन बहादुर जवानों ने समय-समय पर अपनी बहादुरी, हिम्मत और हौसले का प्रदर्शन भी किया है।
गांव जरैलिया निवासी शहीद पंकज नौहवार, रायपुर निवासी शहीद नरेन्द्र सिंह, रामनगला निवासी शहीद सतीश, खाजपुर निवासी शहीद सतवीर नौहवार सहित कई जवानों ने अपना बहादुरी का लोहा मनवाते हुए देश सेवा में अपनी जान कुर्बान की है।