कासगंज। भोले की भक्ति का ज्वार कांवड़ियों में इतना अधिक था कि रविवार की पूरी रात से सोमवार सुबह तक उनकी टोलियां कांवड़े भरकर भगवान भोलेनाथ के अभिषेक के लिए गंगाजल भरकर ले गईं। कांवड़ियों की भीड़ का अद्भुत नजारा लहरा गंगाघाट से लेकर कछला गंगाघाट तक मार्गों पर नजर आया। सोमवार की सुबह छह बजे के बाद तक डाक कांवड़ियों के जत्थे एक के बाद एक फर्राटा भरते निकल रहे थे। डाक कांवड़ हाथ में लेकर कांवड़िये दौड़ते हुए जा रहे थे।जब भी श्रावण मास का सोमवार होता है तो तीन दिन पहले से ही कांवड़ियों की भीड़ गंगाघाटों पर बढऩे लगती है। तीन दिन पहले कांधे पर कांवड़ ले जाने वाले कांवड़ियों की संख्या बढ़ती है, लेकिन डाक कांवड़ियों की संख्या एक दिन पूर्व रविवार को बढ़ती है। रविवार को दिन के समय राजस्थान और भरतपुर इलाके के डाक कांवड़िये कांवड़ भरकर ले जाते हैं। जबकि रात्रि के समय फिरोजाबाद, आगरा, हाथरस, सिकंदराराऊ, मथुरा सहित अन्य इलाकों के कांवड़िये डाक कांवड़ भरकर ले जाते हैं। डाक कांवड़ ले जाने का चलन पिछले 3-4 वर्षों से काफी बढ़ा है। रविवार की रात्रि 10 बजे लहरा व कछला गंगाघाटों पर कांवड़ियों की इतनी भीड़ थी कि कांवड़ भरने आने जाने वाले श्रद्धालुओं को राह मिलना मुश्किल हो रहा था। भीड़ को देखकर पुलिस के भी हाथ पैर फूल रहे थे। रविवार की पूरी रात्रि डीजे लगे सैकड़ों वाहनों के साथ कांवड़ियों के जत्थे सोरोंजी और लहरा तक जगह जगह खड़े नजर आ रहे थे। पूरी रात कांवडिय़ों की टोलियां बाइकों से निकलती रहीं और डाक कांवड़ लिए साथी दौड़ते रहे। श्रद्धा और भक्ति का ऐसा मंजर बना हुआ था कि हर ओर वातावरण बम बम भोले के जयकारों से सराबोर था। उत्साहित कांवड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा बनी हुई थी कि किसकी टोली आगे निकले। पुलिस अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक एक लाख से अधिक कांवडिय़े गंगाजल भरकर ले गए।