कासगंज। शहर से पांच किलोमीटर दूर हजारा नहर का झाल का पुल ब्रिटिश काल से ही लोगों के आकर्षण का केंद्र है। इसके आकर्षण की प्रमुख वजह इंजीनियरिंग कौशल है। ब्रिटिश इंजीनियरों ने सतह पर बहती काली नदी के ऊपर पुल बनाकर हजारा नहर को प्रवाहित किया है। आज भी पुल के नीचे नदी और ऊपर नहर बहती है। यह सिलसिला बीते 135 वर्षों से बना हुआ है।झाल के पुल का निर्माण वर्ष 1885 से 89 के बीच हुआ था। झाल के पुल को नदरई का पुल भी कहा जाता है। इस पुल के आर-पार जाने के लिए सुरंगें बनी हुई हैं। जहां होकर लोग एक तरफ से सुरंग में प्रवेश करके दूसरी ओर निकल सकते हैं। कई लोग इस रोमांच के चलते सुरंगों के अंधेरों को चीरते हुए इधर से उधर निकलते हैं।मइस नहर को नरौरा से गंगा नदी से निकाला है जो कानपुर होते हुए फतेहपुर तक जाती हैं।आयरलैंड की कार्क यूनिवर्सिटी के सहयोग से कार्यकारी अभियंता विलियम गुड ने इस पुल का डिजाइन तैयार किया था। 1300 फीट से अधिक इस लंबे पुल का निर्माण चार साल में हुआ था। 16 जनवरी 1892 में अमेरिका कैलिफोर्निया के अखबार पैसेफिक रूलर प्रेस ने मुख्य पृष्ठ में छापे लेख में झाल के पुल को इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना बताया था। काली नदी के ऊपर पुल बनाकर हजारा नहर को प्रवाहित किया गया। पुल के इस कौशल को देखने के लिए लोग यहां पिकनिक करने आते है।