गाजियाबाद/मैनपुरी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मैनपुरी में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार रेलवे टेलीकॉम जूनियर इंजीनियर (जेई) वेद प्रकाश चतुर्वेदी को बृहस्पतिवार को गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट में पेश किया। अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दूसरा आरोपी सीटीआई, टूंडला डीएस मीणा अभी फरार है। सीबीआई उसकी तलाश में जुटी है। जेई वेद प्रकाश चतुर्वेदी और सीटीआई टूंडला डीएस मीणा पर मां पीतांबरा कंस्ट्रक्शन एंड इलेक्टि्रकल कंपनी के साइट मैनेजर कृपा शंकर की ओर से केस दर्ज कराया गया है। आरोप है कि फर्म द्वारा शिकोहाबाद से फर्रुखाबाद के बीच सिग्नल एवं टेलीकॉम का कार्य कराया जा चुका है। फर्म को भेल की ओर इस कार्य का ठेका मिला था। इस कार्य का कुल 20 लाख रुपये का बिल बना था, जिसके भुगतान की बात कहने पर भेल अधिकारी ने रेलवे से कार्य पूरा करने का पूर्णता प्रमाणपत्र लाने के लिए कहा। इस कार्य के लिए रेलवे के जेई वेद प्रकाश चतुर्वेदी ने चार लाख रुपये (दो-दो लाख) रिश्वत की डिमांड की। केस दर्ज करने के बाद सीबीआई ने जेई और डीएस मीणा की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाया। कृपा शंकर के साथ सीबीआई के इंस्पेक्टर मनीष रस्तोगी अपनी टीम के साथ आए थे। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे जेई और डीएस मीणा को कृपा शंकर ने चार लाख रुपये में से बतौर पहली किस्त एक-एक लाख रुपये देने के लिए फोन पर कहा। जेई ने कृपा शंकर को अपने कार्यालय बुलाया। डीएस मीणा ने अपने पैसे भी जेई को देने को कह दिया। रंगेहाथ गिरफ्तारी के लिए सीबीआई उसे भी बुलाना चाहती थी मगर, डीएस मीणा काम का हवाला देकर नहीं आया। इधर, जेई ने अपने एक लाख रुपये तो ले लिए मगर डीएस मीणा के पैसे, उसे ही देने को कह दिया। जेई के पैसे लेते ही सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद देर रात एक बजे तक उससे पूछताछ की गई और उसके आवास को खंगाला गया। इसके बाद टीम उसे गाजियाबाद ले गई। बृहस्पतिवार सुबह जेई का परिवार सरकारी आवास पर ताला डालकर गायब हो गया। रेलवे स्टेशन पर तैनात जेई वेद प्रकाश चतुर्वेदी चार साल पहले ही सेवा में आया है। दो वर्ष पहले ही उसकी शादी हुई है। वह मैनपुरी में ही सरकारी आवास में निवास परिवार के साथ रह रहा था। मामले में जब रेलवे स्टेशन पर मौजूद अधिकारियों से बात की गई तो कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ।