अजन्मे के जन्म के साक्षी बनने के लिए सुबह से ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान और उसके आसपास देश-विदेश से लाखों भक्त पहुंच गए। भक्तों में कान्हा के दर्शन का उत्साह देखते ही बन रहा था। रात 12 बजने को हुए तो जन्मस्थान स्थित भागवत भवन में श्री कृष्ण के श्रीविग्रह को श्रीराधाकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास महाराज ने सवा मन दूध, दही, शहद, घी, बूरा आदि दिव्य औषधियों से बनाए पंचामृत से अभिषेक किया। इस दौरान गुलाब और चमेली-बेला के पुष्पों की वर्षा होने लगी और यह क्रम अनवरत चलता रहा। भक्त हरिबोल-राधे कृष्ण के जयकारे लगाते हुए दर्शन कर भाव विभोर हो रहे थे। भागवत भवन में विराजमान श्रीराधाकृष्ण की मनोहारी छवि की आभा देखते ही बन रही थी। दर्शन का यह दौर 1.30 बजे तक ऐसे ही चलता रहा।
गोपालदास महाराज अस्वस्थ, देरी से हुआ आभिषेक
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास महाराज के अस्वस्थ होने के चलते उनको भागवत भवन में व्हीलचेयर पर लाया गया। इसके बाद उनके लिए सोफा लगाया गया, जिस पर बैठकर उन्होंने आभिषेक किया। उनके अस्वस्थ होने के कारण करीब 10 मिनट की देरी से लल्ला का आभिषेक शुरू हो सका।