आईएमए की जनरल बॉडी की बैठक में चिकित्सकों ने कहा कि ऑक्सीजन की भारी कमी थी। सिलिंडर के लिए रातभर चक्कर लगाते रहे। प्रशासन अपना दबाव कम करने के लिए डॉक्टरों को बलि का बकरा बना रहा है। बैठक में श्रीपारस हॉस्पिटल को सील करने की कार्रवाई को गलत बताते हुए डॉ. अरिन्जय जैन के पक्ष में खड़े होने का निर्णय हुआ। आईएमए कार्रवाई के विरोध में डीएम को ज्ञापन भी देंगे।
अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा कि पूरी कार्रवाई एक वीडियो के आधार पर की गई है। शासन-प्रशासन ने अपने दबाव को कम करने के लिए बिना जांच किए जल्दबाजी में अस्पताल सील और लाइसेंस निलंबित किया है। डीएम को ज्ञापन देकर विरोध जताएंगे। पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुधीर धाकरे ने कहा कि प्रशासन अपने को बचाने के लिए डॉक्टरों को बलि का बकरा बना रहा है। डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने कहा कि 25, 26 और 27 अप्रैल को ऑक्सीजन की भारी कमी थी। रातभर चक्कर काटने पड़े। डॉ. रजनीश मिश्रा, डॉ. राजेश गुप्ता ने भी ऑक्सीजन की कमी की बात कही। बैठक में सचिव डॉ. अनूप दीक्षित, डॉ. जेएन टंडन, डॉ. पवन गुप्ता, डॉ. सीमा सिंह, डॉ. संजय चतुर्वेदी, डॉ. अनंग उपाध्याय, डॉ. सचिन मल्होत्रा, डॉ. वीरेंद्र खंडेलवाल, डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. जयदीप मल्होत्रा, डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. शम्मी कालरा, डॉ. संजय धवन, डॉ. वनज माथुर, डॉ. अरुण जैन मौजूद रहे।
कुछ डॉक्टरों ने खड़े किए सवाल
श्रीपारस हॉस्पिटल प्रकरण में आईएमए के कुछ चिकित्सकों ने सवाल भी खड़े किए हैं। चिकित्सकों ने कहा कि पूरे प्रकरण में एक बार भी डॉ. अरिन्जय जैन ने आईएमए से संपर्क नहीं किया है और बैठक में भी शामिल नहीं हुए। एक चिकित्सक ने तो यहां तक कहा कि उनके साथ कुछ घटना होने पर आईएमए से मदद मांगी थी, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
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