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पूरा नहीं हुआ ख्वाब तो खुद थाम ली शिक्षा की मशाल

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मैनपुरी। सरकारी शिक्षक बनने का ख्वाब था पूरा नहीं हुआ तो दूसरों के जीवन में उजियारा करने के लिए शिक्षा की मशाल थाम ली। पिछले बीस साल से गांव के परिषदीय स्कूल में बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं। यह कहानी है विकास खंड किशनी के गांव भदेही निवासी संतकार दीक्षित की।
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संतकार दीक्षित ने वर्ष 1982 में श्री एकरसानंद संस्कृत विद्यालय से लव्य व्याकरणाचार्य की डिग्री हासिल की। वे शिक्षक बनना चाहते थे लेकिन कई प्रयास के बाद भी उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। जीविका चलाने के लिए खेतीबाड़ी के साथ गांव में पंड़िताई शुरू कर दी। वह भले ही सरकारी शिक्षक नहीं बन सके लेकिन बच्चों को निशुल्क पढ़ाने की ठान ली। पिछले बीस साल से गांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में निशुल्क शिक्षण कार्य कर रहे हैं। मौजूदा समय में विद्यालय में 102 छात्र पंजीकृत हैं।
योग से सुधार रहे सेहत
किताबी ज्ञान के साथ वह बच्चों को योग का भी ज्ञान दे रहे हैं। सुबह नियमित रूप से बच्चों को योग कराते हैं। उन्होंने विद्यालय में पौधे भी लगा रखे हैं जिनकी देखभाल वह स्वयं करते हैं। साफ-सफाई का जिम्मा भी खुद ही संभालते हैं।
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हमें जो शिक्षा मिली है, उसे बांटना हमारा धर्म है। जीवन की आखिरी सांस तक मैं ज्ञान बांटता रहूंगा। कहा भी जाता है कि ज्ञान जितना बांटोगे उतना ही बढ़ेगा।
-संतकार दीक्षित
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संतकार दीक्षित नियमित रूप से विद्यालय आकर बच्चों को निशुल्क शिक्षा देते हैं। उनके सहयोग से विद्यालय में शिक्षा का बेहतर माहौल है। वह आदर्श शिक्षक हैं।
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-चांद बेग, प्रधानाध्यापक
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