कासगंज। पुलिस अभिरक्षा में मौत का शिकार हुए रसलुआ सुलहपुर के युवक गौरव के पीड़ित परिजनों से मुलाकात करने के लिए भी समाजवादी पार्टी का 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल शनिवार को गांव में पहुंचा। प्रतिनिधि मंडल में शामिल नेताओं ने पीड़ित परिजन को सांत्वना दी। उनका कहना था कि पुलिस अभिरक्षा में गौरव की मृत्यु की घटना पुलिस उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के चलते हुई है। इसकी जितनी घोर निंदा की जाए उतनी कम है। इसके आरोपियों को सजा दी जानी चाहिए।सपा नेताओं ने इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि गौरव अपराधी था तो पुलिस को उसे 24 घंटे के अंदर जेल भेजना चाहिए था और यदि अपराधी नहीं था तो लगातार 7 दिन तक पुलिस की अभिरक्षा में क्यों रखा गया। पुलिस की अभिरक्षा में उसकी मौत होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और शासन और पुलिस की निरकुंशता को दर्शाता है। सपा जिलाध्यक्ष विक्रम यादव ने कहा कि गौरव की हालत बिगड़ने पर भी परिजन को इसकी सूचना नहीं दी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को सरकार एक करोड़ रुपये बतौर मुआवजा दे। मृतक परिवार को सरकारी नौकरी मिले और घटना की सीबीआई जांच होनी चाहिए। पीड़ित परिवार को न्याय मिलना जरूरी है। परिवार को ठेकेदारी पर नौकरी देने का वायदा गुमराह करते वाला है। उन्होंने कहा कि इस सरकार में दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े हैं। पुलिस न कानून का ध्यान रख रही है और न मानव अधिकारों की रक्षा कर पा रही है।