पंचतत्व में विलीन हुए शहीद पृथ्वी सिंह चौहान
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कुछ देख रहे थे ‘पृथ्वी’, कुछ आकाश, कुछ ने बोला चला गया, कुछ बोले ये न होता काश। कुछ सिसक रहे थे। हिचकियां भी थीं। पंचतत्व में विलीन हो रहे थे विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान। किसी की आंखें नम थीं। किसी की आंखों के आंसू सूख चुके थे। सीना ताने भी ताजगंज श्मशान घाट पर लोग खड़े थे। खास बात यह रही कि जिस बूढे़ पिता को डॉक्टर ने खड़ा होने से मना कर दिया, वो भी सलामी देने के लिए विंग कमांडर के सम्मान में देर तक खड़े रहे। 80 साल के दीनदयाल ने नम आंखों से कहा कि लाड़लौ, चलौ गयो। हस्ती चली गई।
बहुत रुला रही है ये शाम...
शमशान घाट पर राष्ट्र के वीर सपूत को सलामी देने के लिए शहर के कई साहित्यकार भी पहुंचे। शृंगार में लिखने वाले कवि कुमार ललित का कहना था कि ‘बहुत रुला रही है ये शाम..। देश के वीर तुझे सलाम...।’ खिलाड़ियों ने भी देश के वीर सपूत को श्मशान घाट पहुंचकर नमन किया। वीवी मार्शल आर्ट्स एकेडमी के हेड कोच विपुल वर्मा बच्चों की क्लास छोड़ कराटे की ड्रेस में ही पहुंच गए। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है मैं उस शहर में रहता हूं जिस शहर के विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान हैं। इसके अलावा शहर के हरेक हर वर्ग के लोग भी अंतिम यात्रा में शामिल रहे।
और बदल दिया अंत्येष्टि स्थल
दयालबाग स्थित आवास से पृथ्वी सिंह की पार्थिव देह अंतिम संस्कार के लिए ताजगंज मोक्षधाम पहुंची। यहां गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए पहले ही वायु सेना के जवान पहुंच चुके थे। पहले पुराने अंत्येष्टि स्थल पर तैयारियां की गईं। वहां अन्य चिताएं जल रही थीं। गीली लकड़ियों के धुएं में वहां खड़े होना मुश्किल हो गया। फिर अचानक अंत्येष्टि स्थल बदला गया। नव निर्मित परिसर में अंतिम संस्कार की सफाई कराई गई। पानी का छिड़काव हुआ। दोपहर करीब 1.48 मिनट पर नए अंत्येष्टि स्थल पर पृथ्वी सिंह की पार्थिव देह रखी गई। फिर यहां अंतिम विदाई के लिए नेताओं, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों व विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने शहीद को पुष्पांजलि अर्पित की। करीब एक घंटे बाद तीन बजे पृथ्वी के भतीजे सोनू व पुत्र अविराज ने मुखाग्नि दी। इस दौरान वायु सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सैन्य सम्मान के साथ शहीद की अंतिम विदाई हुई।
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