कासगंज। जनपद को सृजित हुए 16 साल का समय बीत चुका हैं, लेकिन अब भी जिले में मिलने वाले अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार एटा में होता है। एटा की संस्कार मानव सेवा समिति कासगंज में मिले 285 शवों के अंतिम संस्कार कर चुकी है। ऐसे में अज्ञात लोगों को मरने के बाद अपनाें का कांधा तो मिल ही नहीं पाता बल्कि उन्हें अपने जिले की मिट्टी नसीब नहीं हो काती है। जिले का सृजन वर्ष 2008 में हुआ था। डेढ़ दशक से अधिक समय बीत चुका है कि लेकिन लावारिश लाशों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था जनपद में नहीं हो सकी है। अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार पड़ोसी एटा जिले में पूर्व भांति हो रहा है। वर्ष 2012 से अब तक 285 लावारिस शव पुलिस ने बरामद किए हैं। इन शवों का काफी प्रयास के बाद भी शिनाख्त नहीं हो सकी। इन शवों के दाह संस्कार का इंतजाम जिले में नहीं होने के कारण इन शवों को एटा ले जाना पड़ता है। वहां संस्कार मानव सेवा संस्था शवों का अंतिम संस्कार करती है। अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के लिए न तो जिला प्रशासन और न किसी स्थानीय स्वयंसेवी संस्था ने कदम बढ़ाया है।जनपद में अब तक मिले 285 शवों में से 60 महिला और 225 पुरुषों के शव रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा कासगंज कोतवाली क्षेत्र में कुल 84 शव बरामद किए गए। वहीं सुन्नगढ़ी क्षेत्र में एक पुरुष का शव मिला। वृद्धाश्रम से एक वृद्ध का शव अंतिम संस्कार के लिए एटा भेजा गया। संस्कार मानव सेवा समिति के संस्थापक अमित चौहान ने बताया कि लगभग 13 वर्ष पूर्व उन्होंने लावारिस शवों की बेकदरी होते देखा। इसके बाद उन्होंने मई 2012 में एटा और कासगंज में मिले लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का जिम्मा लिया। वह शवों का रीति-रिवाज के अनुसार दाह संस्कार करवाते हैं। उनकी अस्थियों को हर तीन माह बाद गंगा में विसर्जित किया जाता है। संस्था में सत्यप्रकाश, दीपक चौहान, विशाल कुलश्रेष्ठ, भगवानदास वार्ष्णेय, यतेंद्र गुप्ता, सुधा सक्सेना सहित 40 सदस्य यह कार्य कर रहे है।