मैनपुरी। सड़कों का किनारा हो या फिर स्ट्रीट लाइन के खंभे, सभी जगह होर्डिंग ही होर्डिंग नजर आते हैं। अगर ये कहा जाए कि जहां भी जगह मिलती है तो वहां होर्डिंग लग जाती है तो ये गलत नहीं होगा। ये होर्डिंग एक ओर जहां शहर की सुंदरता खराब कर रहे हैं तो वहीं सड़क हादसों से लेकर राजस्व घाटे तक का कारण ये होर्डिंग बन रही हैं।
होर्डिंग लगाने के नियम हैं। होर्डिंग के साइज से लेकर उसकी सड़क से दूरी और ऊंचाई तक सब कुछ निर्धारित है, लेकिन ये निर्धारिण केवल नगर पालिका और प्रशासन की फाइलों तक ही सीमित है। हाल ये है कि विज्ञापन एजेंसियां जहां मन आता है, वहीं हाेर्डिंग लगा देती हैं। जेल चौराहे से शहर में प्रवेश करें तो दोनों तरफ होर्डिंग ही होर्डिंग नजर आते हैं। ऐसा ही हाल सिंधिया तिराहा, करहल चौराहा व अन्य स्थलों का भी है। यहां तक कि नगर पालिका कार्यालय के मुख्य द्वार भी होर्डिंग से रोड भरी पड़ी है।
इन होर्डिंग को हटवाने के लिए नगर पालिका कोई कार्रवाई नहीं करती है। मनमानी तरीके से लगाए गए होर्डिंग नगर पालिका और प्रशासन को राजस्व का भी नुकसान कर रहे हैं। नियमानुसार होर्डिंग लगाने के लिए नगर पालिका को टैक्स देना अनिवार्य है। लेकिन नगर पालिका और प्रशासन को इसकी परवाह ही नहीं है।
वहीं दूसरी तरफ सड़क किनारे लगे होर्डिंग हादसों का कारण भी बन रहे हैं। कई बार वाहन इनमें टकरा जाते हैं तो कभी ध्यान भटकने के कारण भी हादसे होते हैं।