मैनपुरी। जिले में संग्रहालय न होने से ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खोता जा रहा है। जिले के युवा जनपद के इतिहास से अनजान बने हुए हैं। ऐसा नहीं है कि जिले का कोई इतिहास नहीं रहा है। जिले में कई ऐतिहासिक स्थान हैं। जिनका सतयुग, त्रेता और द्वापुर युग से नाता रहा है। संग्रहालय न होने के कारण जिले की युवा पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक धरोहर से परिचित नहीं हो पा रही है। जिले में कई स्थान ऐसे हैं जो जिले की ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे हुए हैं। इनमें पहला स्थान महाराजा तेज सिंह किले का आता है। रखरखाव के अभाव में ये किला पूरी तरह से वीरान हो चुका है। किले में पुरातन युग के कई अस्त्र और शस्त्र समय-समय पर मिलते रहे हैं। जिले में काई संग्रहालय नहीं है। इसलिए इन अस्त्र शास्त्रों का संग्रह यहां नहीं हो सका है। त्रेतायुग की बात करें तो यहां वाल्मीकि की कुटिया घिरोर क्षेत्र में बताई जाती है। बताया जाता है कि यहां ऋषिब वाल्मीकि का आश्रम था। द्वापुर युग की बात करें तो घिरोर क्षेत्र के विधूना में विधुर का किला बताया जाता है। यहां पांडवों के चबूतरों आदि के अवशेष आदि भी मौजूद हैं। मार्कंडेय ऋषि के मुख्य मंदिर के सामने एक पत्थर की मथनी के अवशेष हैं बताया जाता है कि यह सतयुग के दौरान की है। यही नहीं जनपद के औंछा में च्यवन ऋषि का आश्रम है। यहां भी समय-समय पर खोदाई में महाभारत काल के कई अवशेष मिलते रहे हैं। बेवर में कपिलमुनि का आश्रम भी है इसका भी पुरातन युग से नाता बताया गया है।
कुरावली के गनेशपुर में जमीन में दबे मिले थे अस्त्र
वर्ष 2022 में जनपद के विकास खंड कुरावली में खोदाई के दौरान प्राचीनकाल के अस्त्र मिले थे। जिन्हें पुरातन विभाग की टीम अपने साथ ले गई। यदि जिले में ही संग्रहालय होता तो आने वाली पीढ़ी को जिले के इतिहास की जानकारी और पुरातन वस्तुओं की जानकारी मिल सकती।
पर्यटन मंत्री से भी पूर्व की जा चुकी है मांग
मैनपुरी सदर सीट से विधायक जयवीर सिंह वर्तमान में पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री है। जिले के लोगों ने उनसे जिले में संग्रहालय बनवाए जाने की मांग पूर्व में की थी। उनके द्वारा जिले में ऑडीटोरियम के लिए घोषणा की थी। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई निर्माण आदि होता नजर नहीं आ रहा है।
संग्रहालय अपने आप में खास होते हैं। ये हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत सहजते हैं। संस्कृति व समाज की तस्वीर भी दिखाते हैं। इसलिए जिले में संग्रहालय की स्थापना जरूरी है।
डॉ. पदम सिंह, पदम, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक
मैनपुरी का इतिहास पुरातन है। पुरातन विभाग ने भी यहां आकर समय-समय पर कुछ रिकार्ड खंगाले हैं। खोदाई के दौरान विभिन्न युगों की वस्तुएं भी जिले में मिली हैं। लेकिन उनका संग्रह जनपद में न होने से कोई लाभ नहीं है। जिले में संग्रहालय स्थापित हो।
प्रेमचंद्र शाक्य, वरिष्ठ साहित्यकार
किसी भी जनपद या क्षेत्र के इतिहास की पहचान संग्रहालय में रखी वस्तुओं से होती है। यदि मैनपुरी की वस्तुएं दिल्ली, आगरा और लखनऊ के संग्रहालय में रखी जाएंगी तो जनपद के लोग उन्हें कैसे देख पाएंगे। जनपद में ही जनपद की ऐतिहासिक वस्तुओं का संग्रह किया जाए।
गिरीश चंद्र निराला, वरिष्ठ कवि
युवा अपने जनपद का इतिहास जानना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें पुरातन वस्तुओं की जानकारी होनी चाहिए। बुजुर्गों से वे अपने जनपद के इतिहास की गाथा तो सुनते हैं लेकिन ऐतिहासिक धरोहर के रूप में उन्हें प्राचीन वस्तुएं नहीं मिल पा रही हैं। जिले में संग्रहालय हो तो जिले के युवा इतिहास की वस्तुएं देख सकें।
शिवालिनी यादव, युवा कवयित्री