हिंदी का मान बढ़ाने वाले कवि और साहित्यकार
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हिंदी हमारी मातृभाषा होने के साथ विश्व की सबसे श्रेष्ठ और सरल भाषा है। शायद ही हिंदी जितनी कोई स्पष्ट भाषा हो। हमें चाहिए कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी में हिंदी के प्रति प्रेम को जागृत करें। प्रतिभाओं को भी सम्मान मिलना बहुत जरूरी है।
- संजय दुबे, कवि।
वैसे तो हिंदी किसी परिचय की मोहताज नहीं है, लेकिन आज हिंदी का लोहा विश्व के अन्य देश भी मान रहे हैं। हिंदी संस्थानों में दूसरे देशों से लोग हिंदी सीखने और डिग्री लेने के लिए आ रहे हैं। हमें भी हिंदी का सम्मान करना चाहिए।
- डॉ. पदम सिंह पदम, कवि।
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हिंदी के मुकाबले कोई भी दूसरी भाषा है ही नहीं। मैंने अपने जीवन में हिंदी की सेवा करते हुए कई पुस्तकें लिखीं। आज जरूरत है कि आने वाली पीढ़ियों को हिंदी के गौरव से अवगत कराएं। हिंदी से भंग होते मोह को रोकना बहुत जरूरी है।
- लाखन सिंह भदौरिया, कवि।
मैनपुरी की धरा पर अनगिनत हिंदी की सेवा करने वाले कवि और साहित्यकार हुए हैं। आज भी इसकी कोई कमी नहीं है। अगर सरकार का साथ मिले तो हिंदी की सेवा में मैनपुरी विश्व पटल पर अपना योगदान कर सकता है।
- बलराम श्रीवास्तव, कवि।