मैनपुरी। दो साल पहले बनी नगर पंचायत बरनाहल में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने चेयरमैन सहित सभी 12 वार्ड में प्रत्याशी उतारे। बरनाहल नगर पंचायत के मतदाताओं ने भाजपा का पहला चेयरमैन तो बना दिया, लेकिन सात वार्ड में भाजपा के सभासद प्रत्याशियों को नकार दिया। पांच वार्ड में ही भाजपा के सभासद जीत हासिल कर सके। बरनाहल के नगर पंचायत बनने के बाद पहली बार बरनाहल के मतदाताओं ने शहर की सरकार चुनने के लिए मतदान किया। चेयरमैन पद के लिए मतदाताओं ने मतदान करके आरएसएस के स्वयं सेवक योगेंद्र गुप्ता की पत्नी शशि गुप्ता को चेयरमैन बना दिया, लेकिन भाजपा की टिकट पर लड़े सात वार्ड के प्रत्याशियों को पूरी तरह नकार दिया। भाजपा ने रणनीति के तहत बरनाहल नगर पंचायत को भगवा रंग में रंगने के लिए सभी 12 वार्ड में प्रत्याशी उतारे। सभासद प्रत्याशियों ने भाजपा की नीतियों के तहत ही मतदाताओं से समर्थन मांगा, लेकिन भाजपा के पांच सभासद ही मतदाताओं का विश्वास हासिल कर सके।
नगर पंचाायत बरनाहल में भाजपा के प्रतिनिधि के रूप में पहली बार तीन महिलाओं सहित पांच पुरुषों ने जीत हासिल की है। भाजपा के चुने गए सभासदों में वार्ड नंबर तीन से शीतला देवी, वार्ड नंबर छह से श्रीमती देवी, वार्ड नंबर नौ से नीता अग्रवाल, वार्ड नंबर पांच से ब्रजेश चौहान, वार्ड नंबर आठ से आशीष गुप्ता शामिल हैं।
चार निर्दलीय को सौंपी कमान
बरनाहल के मतदाताओं ने चार वार्ड में सपा और भाजपा दोनों ही दलों के प्रत्याशियों को पूरी तरह नकार दिया। निर्दलीय प्रत्याशियों पर भरोसा करके उनको ही वार्ड की कमान सौंप दी। चार वार्डों का प्रतिनिधित्व निर्दलीय सभासद ही करेंगे। इनमें वार्ड नंबर दो से विनीता देवी, वार्ड नंबर सात से ओमवती, वार्ड नंबर चार से विपिन कुमार तथा वार्ड नंबर दस से मकसूद अली सभासद चुने गए।
सपा की भी उठेगी आवाज
बरनाहल नगर पंचायत में विकास कार्य कराने के लिए सपा की भी आवाज उठेगी। सपा प्रत्याशी के रूप में दो महिलाओं सहित तीन सभासद भाजपा प्रत्याशी को हराकर जीते हैं। वार्ड नंबर एक से नीलम देवी, वार्ड नंबर 12 से पूनम यादव तथा वार्ड नंबर 11 से रमन यादव सभासद चुने गए हैं।
बहुमत के लिए निर्दलीय का सहारा
नगर पंचायत में किसी प्रस्ताव को पास कराने के लिए भाजपा के पास बहुमत नहीं है। 12 सभासद में से भाजपा के पास केवल पांच सभासद ही हैं। तीन सभासद सपा के हैं। चेयरमैन को प्रस्ताव पास कराने के लिए निर्दलीय सभासदों का ही सहारा रहेगा। भाजपा के सहारे चेयरमैन सामान्य तौर पर बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित नहीं करा पाएंगे।