मैनपुरी। शनिवार से गुप्त नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं। इसके लिए शुक्रवार को शहर के प्रमुख बाजारों में भक्तों की भीड़ दिखाई दी। भक्तों ने गुप्ता नवरात्र में पूजा पाठ के साथ व्रत रखने का संकल्प लिया है। इस बार गुप्त नवरात्र 10 महाविद्याओं के साथ आ रहे हैं इसलिए ये 10 दिन तक आयोजित होंगे। घरों में भक्तों ने इसके लिए तैयारियां की हैं।
आचार्य रामानंदन बताते हैं कि गुप्त नवरात्र में शक्ति की उपासना की जाती है। इस दौरान माता के भक्त व्रत भी रखते हैं और माता की पूजा आराधना भी करते हैं। आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्याओं की पूजा का विधान है। वे बताते हैं कि पंचांग के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ की गुप्त नवरात्र छह जुलाई से 15 जुलाई तक रहेगी। चतुर्थी तिथि में बढ़ोतरी के साथ ही नवरात्र नौ के बजाय 10 दिनों की होगी।
उन्होंने बताययाकि गुप्त नवरात्र के दौरान 10 महाविद्याओं मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा-आराधना की जाती है। माना जाता है कि गुप्त नवरात्र में इन देवियों की पूजा करने से ब्रह्मांड की रहस्यमयी शक्तियां प्रकट होती हैं।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
आचार्य रामानंदन के के अनुसार घटस्थापना का शुभ मुहूर्त छह जुलाई को सुबह 5:12 बजे से शुरू होकर 7:25 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त पर भी कलश स्थापना की जा सकती है। यह सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापित करना बेहद शुभ माना जाता है।
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ये प्रमुख 10 विद्य्रा
- गुप्त नवरात्र के पहले दिन मां काली की साधना होती है। मां काली की साधना करने से साधक को विरोधियों और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
- दूसरे दिन माता तारा की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि सबसे पहले महर्षि वशिष्ठ ने महाविद्या तारा की उपासना की थी। महाविद्या माता तारा को तांत्रिकों की देवी माना गया है। देवी की आराधना से आर्थिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति होती है।
- तीसरे दिन माता त्रिपुरा सुंदरी की साधना होती है। इन्हें ललिता या राज राजेश्वरी भी कहा जाता है।
- चौथी महाविद्या माता भुवनेश्वरी की साधना होती है। संतान सुख की इच्छा वाले दंपती के लिए माता भुवनेश्वरी की साधना फलदायी होती है।
- पांचवीं महाविद्या माता छिन्नमस्ता की साधना होती है। इनकी साधना अगर शांत मन से की जाए तो माता शांत स्वरूप में होती है और उग्र रूप से की गई साधना से माता के उग्र रूप के दर्शन होते हैं।
- छठी महाविद्या माता त्रिपुरा भैरवी हैं। इनकी साधना से जीवन के सभी बंधनों से मुक्ति मिलती है।
- सातवीं महाविद्या के रूप में गुप्त नवरात्रि में मां धूमावती की साधना की जाती है। इनकी साधना करने वाला महाप्रतापी और सिद्ध पुरुष कहलाता है।
- आठवीं महाविद्या को बगलामुखी कहा गया है। इनकी साधना से भय से मुक्ति मिलती है। वाक सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
- मातंगी नौवीं महाविद्या हैं। इनकी साधना से गृहस्थ जीवन में खुशहाली आती है।
- माता कमला को दसवीं महाविद्या कहा गया है। इनकी साधना से धन, नारी और पुत्र की प्राप्ति होती है।