कासगंज। किसी जमाने में रुतबा गालिब करने का धंधा गन हाउस आज अपने बुरे दौर में पहुंच चुका है। सरकार के सख्त नियमों के चलते इनके धंधे में काफी गिरावट आई है। इसके चलते जिले में ही बीते तीन साल में पांच गन हाउस बंद हो चुके हैं। वहीं अन्य गन हाउस संचालक भी इस धंधे से किनारा करने की तैयारी में हैं। जिले में कुछ समय पूर्व 35 गन हाउस संचालित होते थे। इन पर बंदूक, पिस्टल, रायफल आदि की खूब बिक्री होती थी। उस समय नियम भी सख्त नहीं थे। लोगों के आवेदन करने पर आसानी से शस्त्र लाइसेंस बन जाते थे। कारतूस की भी खूब बिक्री होती थी। इससे गन हाउस संचालकों का व्यापार काफी अच्छा चलता था। वहीं अब बीते कुछ वर्षों में गन हाउस पर बंदूक, पिस्टल व रायफल आदि के साथ कारतूस की बिक्री में भी काफी गिरावट आई है। इसका कारण सरकार द्वारा बनाए गए सख्त नियम हैं। सरकार के निर्देशों के चलते जिले में आसानी से शस्त्र लाइसेंस नहीं बन रहे हैं। काफी आवश्यक होने पर ही आवेदक को शस्त्र लाइसेंस जारी किया जाता है। यदि लाइसेंस जारी हो भी जाता है तो आवेदक अब सीधे ऑर्डिनेंस फैक्टरी में ही शस्त्र के लिए आवेदन कर देते हैं और सीधे फैक्टरी से ही अपने लिए पिस्टल आदि ले आते हैं। इससे गन हाउस में लोग कम ही शस्त्र खरीदने पहुंचते हैं।