चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज में मौजूद किसानों की मित्र कही जाने वाली हरी चिड़िया यानि ग्रीन बी ईटर का शिकार करने का अंदाज लोगों को चकित कर देता है। यह चिड़िया मधुमक्खी, ततैया, कीट पतंगे, टिड्डे का हवा में कलाबाजी करते हुए शिकार करती है। डंक को नष्ट करने के बाद कीटों को निगलती हैं। नदी के पानी की सतह से भी शिकार को पकड़ने में माहिर है।
अफ्रीका, ईरान, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका में पाई जाने वाली चिड़िया ग्रीन बी ईटर की खूबसूरती भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसका वैज्ञानिक नाम मेरोप्स ओरिएंटलिस है। स्थानीय लोग इसे हरी चिरैया पुकारते हैं। दीमक और चीटियां भी ग्रीन बी ईटर के भोजन में शामिल हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान किसान मित्र के रूप में है।
बाह के रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्य भोजन मधुमक्खी होने से ग्रीन बी ईटर नाम पड़ा है। ग्रीन बी ईटर आमतौर पर कीट-पतंगों को सुबह सात से आठ और शाम को चार से पांच बजे तक हवा में पकड़कर खाती है। मार्च में इनका प्रजनन सीजन शुरू होगा। नदी किनारे के गड्ढों, टीलों के सहारे सुरंगनुमा (पांच फीट गहराई तक) घोंसले बनाती है।
शरीर पर पांच रंग तक
ग्रीन बी ईटर में हरे रंग के साथ, ठोडी और गले पर नीला, सिर पर पीला, लाल-नारंगी रंग होता है। चोंच काली और पैर गहरे भूरे रंग के होते है। हरे चमकीले रंग की पंखुडी वाली चिड़िया की चोंच से आंख तक काली रेखा होती है। 15 साल के औसत जीवन काल वाली इन चिड़ियों की लंबाई 15-18 सेमी, वजन 15-25 ग्राम, पंख फैलाब 25-30 सेमी होता है। नर-मादा एक जैसी दिखती हैं।