ईमानदारी के लिए मिसाल बने लाल बहादुर शास्त्री ने सरकारी खर्चे से चुनाव प्रचार पर सख्त रुख अपनाया था। तत्कालीन गृहमंत्री शास्त्री ने उत्तर प्रदेश समेत सभी राज्य सरकारों से कहा था कि आम चुनाव में सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कतई नहीं किया जाए।
अमर उजाला के 4 फरवरी 1962 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार, शास्त्री ने कहा था कि सरकारी खर्चे पर चुनाव प्रचार न किया जाए। पत्र में उन्होंने राज्य सरकारों को हिदायत देते हुए कहा था कि किसी मंत्री का उद्देश्य चुनाव प्रचार हो, तो वह यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता न ले। अगर सरकारी नीति समझाने के लिए सभा आयोजित की गई है, तो उसको चुनाव सभा से अलग रखा जाए। यदि मंत्री का दौरा अपने निर्वाचन क्षेत्र से अलग पार्टी हित में हो तो भी उसे निजी समझा जाए। अगर उस क्षेत्र में मंत्री का सरकारी काम भी हो तो भी उसका यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता न लिया जाए। साथ ही उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को भी हिदायत दी थी कि वे आम चुनाव में तटस्थ रहें।
बने थे देश के दूसरे प्रधानमंत्री
2 अक्तूबर 1904 को मुगलसराय में जन्मे लाल बहादुर शास्त्री 9 जून 1964 को देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने। वह लगभग 18 महीने प्रधानमंत्री रहे। गृहमंत्री के रूप में उन्होंने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठी चार्ज की जगह पानी की बौछार का प्रयोग शुरू कराया। 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में उनका निधन हो गया।