नगर पंचायत में हो रहे अध्यक्ष पद के चुनाव में मुकाबला इस बार रोचक है। प्रत्याशियों की सूची पर नजर डालें तो कहीं कुर्सी के लिए पति और पत्नी आमने सामने हैं तो कहीं पिता और पुत्र चुनावी दंगल में दो-दो हाथ कर रहे हैं। इसके अलावा भी कई पारिवारिक प्रत्याशी आमने-सामने हैं।
घिरोर नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं। उन्हें चुनाव चिह्न आवंटन भी हो चुका है। इसमें मुख्य रूप से सपा, भाजपा, कांग्रेस और बसपा शामिल हैं। वहीं अन्य प्रत्याशी निर्दलीय मैदान में हैं। लेकिन कुछ प्रत्याशियों के नामांकन के बाद ये चुनाव रोचक हो गया है। सपा ने नगर निवासी अनिल गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है। वे पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में हैं। लेकिन रोचक बात ये है कि उनकी पत्नी सुमन गुप्ता भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में है। इतना ही नहीं उनके भाई संजीव गुप्ता भी निर्दलीय प्रत्याशी हैं। इसी तरह कांग्रेस प्रत्याशी कौशल किशोर के साथ ही उनकी पत्नी संगीता भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
केवल दो दलों तक ही नहीं बल्कि सभा और भाजपा के प्रत्याशियों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। बसपा प्रत्याशी मोहम्मद असलम के सामने उनकी पत्नी और पूर्व चेयरमैन सविस्ता जरी निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। इसके अलावा आजाद समाज पार्टी से मोहसिन और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उनकी पत्नी सोनी अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोंक रही हैं।
ये सियासी रणनीति का एक हिस्सा है या फिर कुछ और ये तो वक्त ही बताएगा। लेकिन जिले भर में इन प्रत्याशियों की चर्चा जरूर है।
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भाजपा प्रत्याशी के दोनों बेटे भी मैदान में
भाजपा से नगर पंचायत अध्यक्ष घिरोर के लिए यतींद्र जैन को प्रत्याशी बनाया गया है। लेकिन उनके दोनों बेटे अभिषेक और विपलव जैन भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में सभी मुख्य दलों के प्रत्याशियों के परिवार से कोई न कोई चुनावी मैदान में जरूर है। इसका प्रत्याशी फायदा उठाएंगे या नुकसान ये बाद में ही पता चल सकेगा।
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नाम वापसी का था लोगों को इंतजार
नामांकन प्रक्रिया के दौरान जब प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के परिवारजन ने भी नामांकन दाखिल किए तो लोग सकते में थे। उन्हें लगा शायद बाद में परिवार के लोग नाम वापस ले लेंगे। लेकिन चुनाव चिह्न आवंटन के बाद ये साफ हो गया कि मुख्य दलों के प्रत्याशियों के साथ ही उनके परिजन भी चुनावी मैदान में दो-दो हाथ करेंगे। ऐसे में उनकी चर्चा होना लाजिमी है।
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जानकार मान रहे हैं सियासी रणनीति
जानकारों के अनुसार घिरोर में अध्यक्ष पद के लिए मुख्य दलों के प्रत्याशी के साथ ही उनके परिवार के लोगों का नामांकन एक सियासी रणनीति का हिस्सा है। वे बताते हैं कि परिवार के लोग वोट मुख्य दल के प्रत्याशी के पक्ष में ही मांगेंगे। लेकिन निर्दलीय प्रत्याशियों को मिलने वाले वाहनों की अनुमति, एजेंट आदि का फायदा मुख्य दलों के प्रत्याशी उठा सकेंगे। चुनाव खर्च में भी ये गणित खूब फिट होगा।