कासगंज। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में पिछले दिनों हुई बारिश का असर गंगा में उफान के रूप में सामने आया है। जलस्तर में खासी बढ़ोतरी हुई है। उफनती गंगा की धारा जिले के तटीय इलाके के बीस से अधिक गांव तक पहुंच गई है। खेत-खलिहानों में पानी भर गया है। वहीं सड़कों के किनारे भी गंगा के पानी की दस्तक पहुंच गई है। पानी और बढ़ने से सड़कों के ऊपर से पानी गुजरने लगेगा। भुजपुरा इलाके में सड़क पार करके पानी फैल रहा है। कटान प्रभावित नगला खंदारी व नेथरा में भी बाढ़ के हालात से दुश्वारियां बढ़ने लगी हैं। खेतों की ओर लगातार बाढ़ का पानी पहुंच रहा है। इस वर्ष अब तक का सबसे अधिक जलस्तर बताया जा रहा है, हालांकि यह खतरे के निशान फिलहाल नीचे है। गंगा के जलस्तर में रविवार के मुकाबले 15 सेंटीमीटर की वृद्धि सोमवार सुबह तक हो गई। इसके बाद भी लगातार वृद्धि का सिलसिला चला। निचले तटीय इलाकों में बाढ़ के पानी का फैलाव होने लगा। रविवार को नरौरा से 1.42 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज था। यह डिस्चार्ज बढ़कर 1.67 क्यूसेक पर पहुंच गया। रविवार को कछला ब्रिज का जलस्तर 163.65 मीटर के निशान पर था। यह बढ़कर 163.80 मीटर तक पहुंच गया जो खतरे के निशान से 1.40 मीटर नीचे है। यह जलस्तर इस वर्ष का सबसे उच्चतम जलस्तर है। इस वर्ष अधिकतम 163.65 मीटर के निशान पर ही गंगा का पानी पहुंचा था। गंगा की बाढ़ से लहरा, दतलाना, उढ़ेर, डिंगलेशनगर सहित अन्य इलाकों की खादर में जहां पानी की दस्तक पहुंची है। वहीं सहवाजपुर में बाढ़ का पानी आबादी की सड़क के किनारे तक पहुंच गया है। बमनपुरा गांव में आबादी तक पानी पहुंच गया है। मुख्य सड़क पर बाढ़ के पानी में होकर लोग गुजर रहे हैं। बमनपुरा गांव की पुलिया भी पानी के दबाव से टूट गई। वहीं अजीत नगर इलाके के खेतों में पानी पहुंच गया है। किलौनी, किसौल, नगला ढाव की ओर भी पानी की दस्तक पहुंच गई। नगला जयकिशन में भी आबादी तक पानी की दस्तक है। यहां भी खेत बाढ़ के पानी से लबालब हैं। नगला खंदारी, नेथरा, कादरगंज व आस पास के इलाके भी गंगा की बाढ़ के पानी से जलमग्न हैं। गंगा के पानी का फैलाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रात के समय भी यह फैलाव और अधिक बढ़ेगा। 20 से अधिक गांव तक बाढ़ के पानी की दस्तक हो चुकी है और यहां प्रभावित इलाकों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।