कासगंज। उप्र राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने शनिवार को शहर के साथ देहात के भी आंगनबाड़ी केंद्रों और शहर स्थित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। शहर के छह केंद्रों में से चार केंद्र बंद मिले। जबकि वृद्धाश्रम में सफाई नहीं थी और दवाओं की भी कमियों की शिकायत मिली। सदस्य रेनू गौड़ शनिवार की सुबह अशोक नगर पहुंची। यहां 300 मीटर के क्षेत्र में स्थित छह आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्होंने निरीक्षण किया। इनमें से चार केंद्रों पर ताले लटके हुए थे। जबकि दो आंगनबाड़ी केंद्र खुले मिले। यह दोनों ही केंद्र आमने-सामने 10 वाई 10 की दुकान में संचालित हो रहे थे। इनमें से एक में दो बच्चे बैठे हुए थे लेकिन यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका मौजूद नहीं थीं। दूसरे पर कार्यकर्ता उपस्थित मिली लेकिन सहायिका अनुपस्थित रहीं। इसके बाद सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एक स्थान पर बुलाकर उन्हें चेतावनी दी गई। यहां से गांव पहाड़पुर में पहुंची, यहां आंगनबाड़ी केंद्र पर 16 में से 10 बच्चे और स्टाफ भी उपस्थित थे। जबकि गांव देवरी में केंद्र बंद था। ग्रामीणों ने बताया कि यहां तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका की काफी समय पूर्व मौत हो चुकी है। इसके बाद यहां कोई तैनात नहीं किया गया। इस पर परिवार की ही विधवा महिला को कार्यकर्ता बनाने के लिए डीपीओ से बात की। वृद्धाश्रम में नहीं दवाएं, सफाई व्यवस्था भी बदहाल : उन्होंने सहावर गेट स्थित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया। यहां उन्हें शिकायत मिली कि बीमार वृद्धों को दवाएं नहीं मिलती। एक महिला को एलर्जी के कारण शरीर पर सूजन थी। वृद्धा रामा देवी ने शिकायत की कि उसने अपनी वृद्धा पेंशन के दस हजार रुपये निकाल कर अपना उपचार कराया है। इस पर सदस्य रेनू गौड़ ने समाज कल्याण अधिकारी को परिस्थितियों से अवगत कराया।