एटा में गैंगस्टर एक्ट कोर्ट के बाद एससी-एसटी एक्ट के मामले में भी पूर्व विधायक व सपा नेता रामेश्वर सिंह यादव को जमानत नहीं मिल सकी। शुक्रवार को न्यायालय में विशेष न्यायाधीश राम बाबू यादव ने जमानत प्रार्थनापत्र को निरस्त कर दिया।
ये है मामला
रामेश्वर सिंह यादव आदि के विरुद्ध जैथरा थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। आरोप था कि उन्होंने सपा शासनकाल में अनुसूचित जाति के दो भाइयों पर जमीन हड़पने का दबाव बनाया। उन्हें अपने यहां एक महीने तक बंधक बनाकर रखा। इस बीच जमीन के बैनामे करा लिए। उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। शुक्रवार को जमानत प्रार्थनापत्र की सुनवाई के दौरान पूर्व विधायक के अधिवक्ताओं ने बहस करते हुए तर्क दिया कि राजनीतिक द्वेष के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इतने लंबे समय बाद रिपोर्ट लिखे जाने का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
अधिवक्ताओं ने दिया ये तर्क
पुलिस उनका आपराधिक इतिहास भी गलत तरीके से प्रचारित कर रही है। उन्होंने कहा कि दोनों भाइयों ने अपनी मर्जी से बैनामे किए हैं। विवादित जमीन आज भी खाली पड़ी है, उस पर कब्जा नहीं किया गया है। पूर्व विधायक की अधिक उम्र और बीमारी का हवाला देते हुए अधिवक्ताओं ने जमानत की याचना की।
इस आधार पर जमानत हुई निरस्त
इस पर डीजीसी रेशपाल सिंह राठौर और एडीजीसी रक्षपाल सिंह व प्रभात कुमार चौहान ने कड़ा विरोध जताया। कहा कि जमानत मिलने पर आरोपी बाहर आकर गंभीर घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। इस पर न्यायाधीश ने गुण दोष पर बिना विचार किए जमानत देने का आधार नहीं बताया और प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।