मैनपुरी में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने और बिना लाइसेंस के कारोबार करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया गया। इस दौरान आठ विक्रेताओं के खिलाफ एसीजेएम न्यायालय में वाद दायर किए गए हैं। शासन की अनुमति के बाद खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के एक्ट के अनुसार मिलावट और बिना लाइसेंस कारोबार प्रतिबंधित है। इसकी जानकारी के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा निरीक्षण करने के साथ ही नमूने लेकर भी जांच के लिए भेजे जाते हैं। हाल ही में आई जांच रिपोर्ट में छह नमूने जांच में फेल पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार इन नमूनों में मिलावट की श्रेणी हानिकारक स्तर की है।
अधिकांश नमूनों में या तो अखाद्य रंग पाया गया है या फिर मानक से अधिक रंग पाया गया है। अखाद्य रंग कैंसर कारक होते हैं। इसीलिए इसे लेकर विभाग सख्त है। जांच रिपोर्ट आने के बाद शासन की अनुमति के बाद एसीजेएम न्यायालय में आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है। इसमें छह लोगों के विरुद्ध मिलावट करने के लिए और दो लोगों के विरुद्ध बिना लाइसेंस के कारोबार करने के लिए मुकदमा दायर किया गया है। न्यायालय में सुनवाई के बाद ही इसमें निर्णय लिया जाएगा।
इन विक्रेताओं के विरुद्ध दायर हुआ मुकदमा
- सत्यनरायन, समान कटरा, नमकीन में अखाद्य रंग की मिलावट
- गुलबाज खां, बिलहरी बदायूं, आईसकैंडी में रंग की अधिकता
- घनश्याम, मैनपुरी, नमकीन में अखाद्य रंग की मिलावट
- नमन गुप्ता, गाड़ीवान, सॉस में रंग की अधिकता
- कालीचरन, बेवर, कचरी में अखाद्य रंग की मिलावट
- सचिन गुप्ता, बेवर, घी में अन्य तेल की मिलावट
- संजीव कुमार, नसीरपुर फिरोजबाद, बिना लाइसेंस कारोबार
- गोविंद शर्मा, जैतपुर आगरा, बिना लाइसेंस कारोबार
सहायक आयुक्त खाद्य (द्वितीय) डॉ. टीआर रावत ने बताया जांच में छह नमूने हानिकारक पाए गए थे। इसके साथ ही दो विक्रेता बिना लाइसेंस के ही खाद्य पदार्थ का कारोबार कर रहे थे। सभी आठ लोगों के विरुद्ध शासन की अनुमति से न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया है।