मैनपुरी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम रिश्वतकांड में फरार टूंडला रेलवे स्टेशन पर तैनात सीटीआई डीएस मीणा की तलाश में सरगर्मी से जुटी है। मगर, शुक्रवार को भी उसका कोई सुराग नहीं लगा। टीम टूंडला स्टेशन पर पहुंची। वहां उसके बारे में रेलवे के अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ की गई। इसके बाद टीम ने आगरा तक भी दौड़ लगाई। मगर, उसका सुराग नहीं लगा है। इधर, सीटीआई का परिवार भी सीबीआई के हाथ नहीं आया है। बुधवार को मैनपुरी में रेलवे स्टेशन से एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए टेलिकॉम जूनियर इंजीनियर (जेई) वेद प्रकाश चतुर्वेदी को तो बृहस्पतिवार को ही सीबीआई ने गजियाबाद में कोर्ट में पेश कर रिमांड हासिल कर ली थी। मगर, दूसरा आरोपी सीटीआई, टूंडला डीएस मीणा अभी फरार है। जेई वेद प्रकाश चतुर्वेदी और सीटीआई, टूंडला डीएस मीणा पर मां पीतांबरा कंस्ट्रक्शन एंड इलेक्ट्रिकल कंपनी के साइट मैनेजर कृपा शंकर की ओर से केस दर्ज कराया गया है। आरोप है कि फर्म के द्वारा सिग्नल एवं टेलिकॉम का कार्य शिकोहाबाद से फर्रुखाबाद के बीच कराया जा चुका है। तीनों कार्यों का कुल मिलाकर लगभग 20 लाख रुपये का बिल, भेल कंपनी जिसके माध्यम से फर्म को कार्य आवंटित किया गया था, पर बकाया है। जब भेल के कार्यालय जाकर बिल पास कराने की बात कही तो उन्होंने रेलवे के संबंधित अधिकारियों से मिलकर अपने कार्यों की पूर्णता का प्रमाण पत्र लाने के लिए कहा। इस सिलसिले में वेद चतुर्वेदी (जेई) और डीएस मीणा (सीटीआई) से इस मुलाकात कर प्रमाण पत्र देने के लिए कहा तो उन्होंने चार लाख रुपये (दो-दो लाख) रुपये रिश्वत की मांग की। बुधवार को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में वेद प्रकाश चतुर्वेदी को एक लाख रुपये लेते हुए सीबीआई ने रंगेहाथ पकड़ा था।