एसपी कार्यालय के बाहर आत्मदाह की कोशिश करने वाली महिला ने रोते हुए कहा कि बेटी को ढूंढ कर ला दो साहब, न जाने किस हाल में और कहा होगी। आठ महीने से नींद आखों से कोसों दूर रहती है। करवट बदलते हुए बेटी के ख्याल में ही रातें गुजरतीं हैं।
शुक्रवार को औंछा क्षेत्र की रहने वाली महिला ने एसपी कार्यालय के बाद आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे अनहोनी करने से रोक लिया। कार्यालय के बाहर रोते बिलखते हुए पुलिस के बीच घिरी महिला रोते हुए बेटी को ढूंढने की बात कह रही थी। महिला का कहना था कि साहब पुत्री आठ महीने से लापता है, उसे ढूंढ कर ला दो, पता नहीं बेटी किस हाल में और कहा होगी। उसके साथ क्या हुआ होगा, यह सब सोच कर मन घबराता है।
महिला का कहना है कि रात भर बेटी की याद और तकलीफ के बारे में सोच सोच कर करवट बदलते हुए रात गुजर जाती है। जब पुलिस के पास जाती है तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। पुलिस भले ही दो आरोपियों को जेल भेज चुकी है, लेकिन मुख्य आरोपी पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसी वजह से उनकी बेटी के बारे में कोई पता नहीं लग रहा है। उन्हें अपनी बेटी हर हाल में बेटी चाहिए। नहीं तो वह भी जान दे देगी।
थानाध्यक्ष हो चुके हैं लाइन हाजिर
पूर्व में महिला द्वारा आत्मदाह की कोशिश की गई थी। इसके बाद एसपी द्वारा थाना पुलिस को कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक को लाइन किया गया था। उनकी जगह धर्मेंद्र सिंह को औंछा का थानाध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन डेढ़ माह में कोई सार्थक प्रयास पुलिस ने नहीं किया।