मैनपुरी में पति की हत्या के जुर्म में 13 साल बाद बृहस्पतिवार को जब राजरानी जेल से बाहर आते ही बिलख पड़ी। जेल प्रशासन ने उसे चुप कराया और फिर माला पहनाकर विदाई दी। कारागार मंत्री की ओर से महिला की जुर्माना राशि जमा करने के बाद रिहाई संभव हो सकी है।
थाना बिछवां क्षेत्र के गांव महरमई निवासी राजरानी को पति की हत्या के आरोप में वर्ष 2012 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा 25 हजार का जुर्माना भी लगाया गया था। घटना के बाद 24 मई 2010 से वह जेल में ही निरुद्ध थी। हाईकोर्ट में अपील के बाद 29 नवंबर 2022 उच्च न्यायालय इलाहबाद ने राजरानी की जमानत मंजूर कर दी थी। जुर्माना की राशि 25 हजार रुपया जमा करने पर ही रिहाई की बात कही थी। लेकिन जुर्माना की राशि न होने के चलते राजरानी जिला कारागार से बाहर नहीं आ सकी थी।
जेलर पवन कुमार त्रिवेदी ने बताया कि बुधवार को कारागार मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने महिला बंदी से बातचीत के बाद जुर्माना राशि जमा कराई। जुर्माना राशि जमा होने के बाद बृहस्पतिवार को राजरानी को रिहा किया गया है। उधर कारागार से राजरानी के रिहा होने पर उसे फूल माला पहना कर बाहर भेजा गया। बाहर आते ही उसकी आंखो से आंसू बहने लगे। अपनी मां के साथ राजरानी घर चली गई।
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बेटी ने निभाया मां का फर्ज
जेल से बाहर निकलने के बाद राजरानी ने बताया कि उसके छह बच्चे हैं। एक बेटी की वह शादी कर चुकी थी। इसके बाद जेल में आना पड़ गया। इस दौरान उसकी एक बेटी व चार बेटों की परवरिश जनपद एटा में रहने वाली बेटी ने मां बनकर की। 13 साल में बेटी या बेटा उससे मिलने नहीं आए। अब वह बाहर आ गई है तो अपने बच्चों से मिलेगी और नई जिंदगी की शुरुआत करेगी।