कासगंज/सहावर। रबी की फसल की बुवाई का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन किसानों के सामने डीएपी का संकट गहराता जा रहा है। स्थिति यह है कि किसी केंद्र पर खाद नहीं है और जहां खाद उपलब्ध है वहां किसानों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। किसान लगातार परेशान हैं। खाद के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। घंंटों लाइन में लगने के बाद भी उसे खाद नहीं मिल पा रही। इससे उनकी चिंता बढ़ रही है। उसे आशंका है कि खाद की किल्लत जारी रही तो रबी की फसल की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इस समय आलू, मटर, सरसों, चिकोरी, लहसुन आदि की फसलों की बुवाई का सीजन है। इन फसलों की बुवाई के समय डीएपी की आवश्यकता पड़ती है। जिले में काफी बड़े क्षेत्रफल में यह फसलों की खेती की जाती है। इन फसलों का रकबा लगभग 50 हजार हेक्टेयर से अधिक रहता है। सहकारिता विभाग से समितियों को जो खाद उपलब्ध कराई जा रही है वह पर्याप्त नहीं हो पा रही। खाद पहुंचने के कुछ घंटों में ही समाप्त हो जाती है। किसान कई कई दिनों से चक्कर काट रहे हैं। एक जगह स्थित सहकारी समित के क्रय केंद्र पर खाद नहीं मिलती तो वे दूसरे केंद्र पर इस आस से पहुंचते हैं कि शायद वहां खाद मिल जाए, लेकिन उन्हें निराशा ही मिल रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ रही है। यदि समय से फसल नहीं बोई जा सकीं तो इसका असर अन्य फसलों पर भी पड़ेगा।