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Agra News: मोबाइल की स्क्रीन पर जमीं निगाहें, सूखने लगा आंखों का पानी

Tue, 12 Mar 2024 10:51 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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कासगंज। मोबाइल फोन और कंप्यूटर स्क्रीन पर ज्यादा देर तक निगाहें जमाए रखना लोगों की आंखों के लिए घातक साबित हो रहा है। सावधान होने की जरूरत है। बच्चों पर ध्यान दें अन्यथा उनकी आंखें भी ड्राइनेस की शिकार हो सकती हैं। बड़े ही नहीं बच्चों में भी ड्राई आई की बीमारी पनप रही है और यह आदत ग्लूकोमा के खतरे को भी बढ़ा रही है। यह स्थिति अंधेपन का कारण बन सकती है। आंखों के साथ साथ इस आदत का दिमाग पर भी बुरा असर पड़ सकता है। सिर दर्द व अन्य बीमारियां भी बढ़ सकती हैं। जिला अस्पताल में नेत्र विभाग की ओपीडी में सौ मरीजों में कम से कम 25-30 महिलाएं, बच्चे और पुरुष आंखों की ड्राइनेस के पीड़ित पहुंच रहे हैं।लगातार लंबे समय तक मोबाइल व कंप्यूटर की स्क्रीन पर नजर रखने से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की स्थिति बन जाती है। जिससे सिर दर्द, थकान, आंखों में दर्द, आंखों में ड्राइनेस और रोशनी में उतार चढ़ाव हो सकता है और इससे गर्दन, पीठ और कंधे में भी दर्द होता है। बच्चों में पास का दृष्टि दोष पैदा हो सकता है। क्योंकि डिजिटल उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी बहुत हानिकारक रहती है जो बच्चों में मायोपिया की स्थिति पैदा कर देती है। सूखी आंख की बीमारी आंख की सतह की एक बीमारी है। जिससे आंख की सतह को नुकसान पहुंचता है। चिकित्सकों की मानें तो छोटे बच्चे अक्सर मोबाइल फोन पर गेम खेलते हैं और घंटों स्क्रीन पर निगाह लगाए रहते हैं। इससे बच्चों में आंखों की ड्राइनेस की बीमारी बढ़ रही है। पहले बच्चों में यह बीमारी बिल्कुल नहीं होती थी। बच्चों को मोबाइल से बचाना जरूरी है। ड्राई आई सिंड्रोम के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह स्थिति 25 फीसदी आबादी तक पहुंच चुकी है। जिसे लेकर नेत्र चिकित्सक चिंता जताते हैं। नेत्र विशेषज्ञ मोबाइल फोन या किसी तरह की डिजिटल स्क्रीन का सीमित प्रयोग करने की बात कहते हैं, लेकिन लोगों का ध्यान इस पर नहीं है।नेत्र चिकित्सक एवं सीएमएस। डॉ. संजीव सक्सेना का कहना है कि ज्यादा समय तक मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर देखने वाले लोग आंखों की ड्राइनेस का शिकार होते हैं। इससे पीड़ित महिलाओं और बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। क्योंकि महिलाएं और बच्चे काफी देर तक डिजिटल स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं। इनका प्रयोग सीमित करना जरूरी है। वरना आंखों की ड्राइनेस की समस्या और बढ़ेगी। ड्राइनेस से ग्लूकोमा की स्थिति बन सकती है। वहीं, मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्ष राठी का कहना है कि मोबाइल, कंप्यूटर आदि पर ज्यादा देर तक चिपके रहने वाले लोग दिमागी बीमारी का भी शिकार हो जाते हैं। चिड़चिड़ापन, माइग्रेन, सिरदर्द व अन्य समस्याएं भी बढ़ती हैं। आंखों पर तो विशेष प्रभाव पड़ता है। मोबाइल का प्रयोग सीमित करना जरूरी है।
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